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बुधवार, 27 अगस्त, 2008 को 02:35 GMT तक के समाचार
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जम्मू में मुठभेड़ ख़त्म, तीनों चरमपंथी मरे

घेरेबंदी किए हुए सेना के जवान
बीएसएफ़ ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय सीमा से चरमपंथियों के घुसपैठ की सूचना दी थी
जम्मू के चिन्नूर इलाक़े में सेना और चरमपंथियों के बीच सुबह से चल रही लड़ाई में तीनों चरमपंथी मारे गए हैं.

एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी से पुष्टि कर दी है कि तीनों ही चरमपंथी मारे गए हैं.

अधिकारी ने बताया कि तलाशी अभियान शुरु कर दिया गया है.

फिलहाल बंधकों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है.

तीसरा और अंतिम चरमपंथी अब भी एक घर के अंदर है जहाँ उसने एक महिला और चार बच्चों सहित छह लोगों को बंधक बना रखा है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार बंधकों की संख्या आठ है.

घटनास्थल पर पहुंचे आईजीपी के राजेंद्र ने रात में बीबीसी को बताया कि रात में भी सुरक्षा बल वैसा ही संयम रखेंगे जैसा दिन भर रखा था.

यह पूछे जाने पर कि क्या बंधक सुरक्षित हैं राजेंद्र का कहना था, '' हम मान कर चल रहे हैं कि बंधक लोग सुरक्षित हैं. जो रिपोर्टें हैं उससे लगता है कि छह से आठ लोग घर में बंधक हैं.''

इससे पहले दोपहर में तीन में एक चरमपंथी ने बीबीसी को फोन किया था. चरमपंथी ने अपना नाम तलागिरा बताया और कहा कि वो कश्मीर में मुसलमानों पर हो रही ज्यादतियों का बदला लेने के लिए यह कार्रवाई कर रहे हैं.

उन्होंने बीबीसी के ज़रिए प्रशासन से अपील की और कहा, '' हम आपके माध्यम से ये कहना चाहते हैं प्रशासन से कि वो हमला न करें क्योंकि बंधकों में कुछ बच्चे भी हैं और अगर हमला हुआ तो इन बच्चों को नुकसान भी हो सकता है. ''

बुधवार की सुबह तीन चरमपंथियों ने चिन्नूर इलाक़े में अंधाधुंध फ़ायरिंग करके चार लोगों को मार डाला और उसके बाद एक घर में घुस गए.

इसके बाद सेना ने मकान को चारों तरफ़ से घेर लिया और कुछ ही घंटे के भीतर एक चरमपंथी को मार डाला, इसके काफ़ी देर तक कोई कार्रवाई नहीं हुई लेकिन देर शाम ज़ोरदार गोलीबारी हुई जिसके बाद सेना ने एक और चरमपंथी के मारे जाने की पुष्टि की.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि छत से भागने की कोशिश करता एक चरमपंथी सुरक्षाबलों की गोलियों से मारा गया जबकि दूसरा चरमपंथी घर से बाहर निकलने की कोशिश करते वक़्त गोलियों का निशाना बना.

बंधक बनाए गए परिवार के छह सदस्यों में से चार बच्चे हैं. इन बच्चों में सबसे छोटी बच्ची की उम्र दो साल है. उनके अलावा एक पुरुष और महिला सदस्य घर पर हैं.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "सुबह के लगभग आठ-साढ़े आठ बजे की बात होगी हम सो रहे थे. मोहल्ले में उधर से फ़ायरिंग की आवाज़ आई, सब तरफ़ हल्ला होने लगा कि क्या हो गया, क्या हो गया. चरमपंथियों ने एक ऑटो ड्राइवर और रिटार्यड सूबेदार को गोली मार दी, वे मर गए. फिर वे लोग बगल के एक घर में घुस गए जहाँ चार छोटे बच्चे हैं".

अधिकारी चरमपंथियों की गोलीबारी को लेकर इसलिए भी चिंतित थे कि अमरनाथ संघर्ष समिति ने बुधवार को एक बड़ी रैली का आयोजन किया था लेकिन इस मुठभेड़ के चलते उन्होंने अपनी रैली को रद्द कर दिया है.

गोलीबारी

पुलिस का कहना है कि बुधवार को सुबह तीन चरमपंथियों ने जम्मू के बाहरी इलाक़े में दमोना चेकपोस्ट पर गोलियाँ चलाईं.

चरमपंथियों ने एक ऑटो ड्राइवर और रिटार्यड सूबेदार को गोली मार दी, वे मर गए. फिर वे लोग बगल के एक घर में घुस गए जहाँ चार छोटे बच्चे हैं
एक प्रत्यक्षदर्शी

इसमें सेना के एक जवान की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया.

पुलिस का कहना है कि ये वही चरमपंथी हैं जो मंगलवार की सुबह कानाचक इलाक़े से सीमा पार से घुसपैठ करने में सफल हुए थे. बीएसएफ़ ने इसकी सूचना दी थी.

अधिकारियों का कहना है कि चौकी पर फ़ायरिंग करने के बाद सामान ढोने वाले एक ऑटोरिक्शा को अगवा कर लिया और बनतालाब के इलाक़े में पहुँच गए.

वहाँ उन्होंने एक मोटरसाइकल सवार को गोली मार दी और फिर सघन आबादी वाले क्षेत्र चिन्नूर में पहुँच गए.

चिन्नूर में बिल्लू राम के घर में घुसने से पहले उन्होंने ऑटो के ड्राइवर और एक अन्य नागरिक को गोली मार दी.

अधिकारियों का कहना है कि वहाँ कार्रवाई करने में सावधानी बरती जा रही है जिससे कि किसी और को जानमाल का नुक़सान न हो.

इस समय भी घेरेबंदी और मुठभेड़ जारी है. अधिकारियों का कहना है कि वे इस समय यह कहने की स्थिति में नहीं हैं कि कार्रवाई पूरा होने में कितना समय लगेगा.

इस बीच सुरक्षाबलों ने इलाक़े का हवाई निगरानी भी शुरु कर दी है क्योंकि उन्हें सूचना मिली है कि चरमपंथियों की संख्या ज़्यादा भी हो सकती है.

संघर्ष समिति की रैली रद्द

जम्मू में आंदोलन
जम्मू में पिछले दो महीनों से जनजीवन ठप्प सा पड़ा हुआ है

इस बीच अधिकारी इस बात से भी चिंता थी कि बुधवार को अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति ने एक बडी रैली का भी आयोजन किया था.

लेकिन इस घटना के बाद संघर्ष समिति ने इस रैली को रद्द करने की घोषणा की है.

समिति ने कहा है कि सुरक्षा बल इस मुठभेड़ में व्यस्त है और इसके बाद सुरक्षा एक बड़ी चिंता है और समिति सुरक्षा को लेकर एक और समस्या खड़ा नहीं करना चाहती इसलिए रैली रद्द की जा रही है.

इस बीच सरकार के साथ चल रही बातचीत में संघर्ष समिति की शर्तों से रुकावट आ गई है.

संघर्ष समिति ने जम्मू के आईजी और दो ज़िलों के एसएसपी को हटाने की शर्त रख दी है और सरकार ने अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है.

इस बीच पूंछ में कर्फ़्यू जारी है और किश्तवाड़ में सिर्फ़ रात का कर्फ़्यू चल रहा है.

जम्मू में अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने के मामले में पिछले दो महीने से भी अधिक समय से संघर्ष चल रहा है. इस संघर्ष में कई लोगों की जानें गई हैं.

अमरनाथ संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार को मंदिर बोर्ड को ज़मीन दे देना चाहिए लेकिन घाटी के लोग इसका विरोध कर रहे हैं और अलगाववादी संगठनों के नेतृत्व में वहाँ भी हिंसक आंदोलन हुए हैं.

सरकार ने पहले तो अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन दे दी थी लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया.

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