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सुरक्षाबलों की गोलीबारी में चार की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर में कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई हैं जिनमें चार लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हुए हैं. बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के मुताबिक कर्फ़्यू के बावजूद भारत प्रशासित कश्मीर में कई स्थानों पर लोग कर्फ़्यू तोड़कर अपने घरों से बाहर आए. इधर तीन वरिष्ठ अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ और यासीन मलिक पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. जब जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट के नेता यासीन मलिक ने समर्थकों के साथ कर्फ़्यू का उल्लंघन करते हुए लाल चौक कूच करने की कोशिश की तो उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया. एक अन्य नेता शब्बीर शाह की ज़ोरशोर से तलाश की जा रही है. सोमवार को श्रीनगर से लगभग आठ किलोमीटर से दूर नारबल में सुरक्षाबलों की गोलीबारी में एक शख्स की मौत हो गई. इसके अलावा सुरक्षाबलों की गोलीबारी से दक्षिणी पुलवामा में एक व्यक्ति की मौत हुई है और हदवारा के छोटीपुरा गाँव में एक महिला की मौत होने की ख़बर है. एहतियात के तौर पर रविवार से ही कश्मीर घाटी के सभी प्रमुख शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ़्यू लागू है. अलगाववादियों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि आज़ादी की माँग के समर्थन में सोमवार को कश्मीर घाटी के अलग-अलग हिस्सों से प्रदर्शनकारी श्रीनगर के लाल चौक पर इकट्ठा होंगे. लेकिन रास्ते में टीन की दीवारें खड़ी कर दी गईं थीं और कंटीले तारों की बाधा खड़ी कर दी गई थी. इस बीच बांदीपुरा के निकट हाजिन इलाक़े में प्रदर्शनकारियों और अर्धसैनिक बलों के बीच झड़प होने की ख़बर है जिसमें कई लोग घायल हुए हैं. जम्मू में प्रदर्शन
उधर जम्मू में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 10 पुलिसकर्मियों समेत 18 लोग घायल हुए हैं. बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी के मुताबिक जम्मू के कई कस्बों में पूर्ण बंध रखा गया और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर प्रदर्शन किया. पुलिस के अनुसार कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं और पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. कथुआ कस्बे में तो झड़पें और भी हिंसक रहीं जहाँ प्रशासन को कर्फ़्यू लगाना पड़ा. पुंछ और हीरानगर में पहले से ही कर्फ़्यू लगा हुआ है. अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति ने कहा है कि बातचीत जारी रखने के लिए राज्य सरकार की ओर से किसी ने उनसे बात नहीं की है. शनिवार को संघर्ष समिति और राज्य सरकार के बीच तीन दौर की बातचीत हुई थी पर कोई नतीजा नहीं निकला था. दोनों पक्षों ने कहा था कि चर्चा सकारात्मक रही है और अंतिम दौर की बातचीत होगी. जम्मू कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के लिए ज़मीन दिए जाने और फिर वापस लेने के बाद ये विवाद शुरु हुआ था और अब इसने अब तूल पकड़ लिया है. पिछले क़रीब दो महीनों से जम्मू और कश्मीर में अलग-अलग प्रदर्शन हो रहे हैं. जम्मू में जहां अमरनाथ संघर्ष समिति ज़मीन वापस दिए जाने का विरोध करते हुए प्रदर्शन कर रही है वहीं घाटी में जम्मू के प्रदर्शनों के जवाब में प्रदर्शन शुरु हुए पर अब इसमें भारत विरोध और आज़ादी जैसी मांगें उठ रही हैं. |
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