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'राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का वक़्त ख़त्म हो रहा है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास इस्तीफ़ा देने के लिए अधिक वक़्त नहीं बचा है. शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि "मुशर्रफ़ का वक़्त ख़त्म हो रहा है, अगर वे अगले दो दिन के अंदर इस्तीफ़ा नहीं देते तो उनके ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा." पाकिस्तान के राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ महाभियोग का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है जिसे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) का पूरा समर्थन हासिल है, इस महाभियोग प्रस्ताव में उन पर संविधान का उल्लंघन करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. मुशर्रफ़ ने पहले कहा था कि वे महाभियोग का सामना करने के बदले इस्तीफ़ा देना पसंद करेंगे लेकिन अब उनके समर्थक कह रहे हैं कि मुशर्रफ़ महाभियोग प्रस्ताव का सामना कर सकते हैं. पिछले कई दिनों से ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि ब्रिटेन और अमरीका के कूटनयिक परवेज़ मुशर्रफ़ के लिए सुरक्षित रास्ता निकालने की कोशिश में बातचीत कर रहे हैं, ये कूटनयिक चाहते हैं कि मुशर्रफ़ स्वेच्छा से पद छोड़ दें और उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा न चलाया जाए. पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "उनके ख़िलाफ़ अभियोगों की एक लंबी सूची है, हम ज्यादा से ज्यादा मंगलवार तक महाभियोग प्रस्ताव पेश कर देंगे." अगर मुशर्रफ़ पद नहीं छोड़ते हैं और उनके ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव आता है तो उसका सामना करने वाले वे पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति होंगे. मुशर्रफ़ समर्थक पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राष्ट्रपति के सलाहकार सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. पीएमल (नवाज़) के शीर्ष नेता नवाज़ शरीफ़ ने ज़ोर देकर कहा है कि वे परवेज़ मुशर्रफ़ को कोई सुरक्षित रास्ता देने या उनके ख़िलाफ़ मुकदमा न चलाए जाने का वादा करने के ख़िलाफ़ हैं. उन्होंने कहा कि परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए, देशद्रोह का आरोप सिद्ध होने पर फाँसी तक की सज़ा दी जा सकती है. लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) का कहना है कि मुशर्रफ़ पर देशद्रोह का मुकदमा चले या नहीं, इसका फ़ैसला संसद को करना चाहिए. पीपीपी की वरिष्ठ नेता और सूचना मंत्री शेरी रहमान ने कहा, "हमारी पार्टी प्रतिशोध की राजनीति में शामिल नहीं होती है, हमारा उद्देश्य पाकिस्तान में स्थिरता और लोकतंत्र को बनाए रखना है, मुशर्रफ़ का फ़ैसला संसद करेगी." समर्थन नहीं इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता मार्क डमैट का कहना है कि मुशर्रफ़ के पास इतना समर्थन नहीं है कि वह पद पर बने रह सकें, उनके लिए यही विकल्प बेहतर होगा कि महाभियोग से पहले वे अपना पद छोड़ दें. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मुशर्रफ़ पद छोड़ने से पहले इस बात की गारंटी चाहते हैं कि उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा नहीं चलाया जाएगा, इस बारे में कूटनयिक स्तर पर बातचीत चल रही है लेकिन अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है कि इस पर समझौता हो सकेगा या नहीं. सत्ताधारी गठबंधन को यह तय करना होगा कि अगर मुशर्रफ़ पद छोड़ने हैं तो उन्हें कितनी रियायत दी जा सकती है. मुशर्रफ़ ने पिछले वर्ष सेनाध्यक्ष का पद छोड़ दिया था. फ़रवरी महीने में हुए चुनाव में उनका समर्थन करने वाली पार्टियो को भारी हार का सामना करना पड़ा. इस बात के भी साफ़ संकेत मिले हैं कि पाकिस्तान की सेना का समर्थन परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ नहीं है. |
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