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रविवार, 03 अगस्त, 2008 को 11:52 GMT तक के समाचार
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मंदिर में भगदड़, 145 लोगों की मौत
नैना देवी
नैना देवी मंदिर में मची भगदड़ में 100 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं
हिमाचल प्रदेश के नैना देवी मंदिर में मची भगदड़ में अब तक 145 लोग मारे जा चुके हैं. मरने वालों में कई बच्चे शामिल हैं.

हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक (क़ानून और व्यवस्था) सीताराम मार्डी ने ये जानकारी दी है. पुलिस के मुताबिक मंदिर में भीड़ को देखते हुए पूरी व्यवस्था की थी.

लेकिन सुरक्षा इंतज़ामों के वाबजूद घटना कैसे हो गई इस पर मेला अधिकारी और एसडीएम पीसी अकेला ने कहा, "ये मंदिर पहाड़ी पर है. श्रद्धालु नीचे बने बस स्टैंड पर पैदल आते हैं, ये रास्ता टेढ़ा-मेढ़ा है. अगर भीड़ ज़्यादा हो श्रुद्धालुओं को बीच में रोक दिया जाता है. श्रद्धालु चार-छह घंटे से बैठे इंतज़ार कर रहे थे. किसी ने अफ़वाह फैला दी कि ऊपर से कुछ पत्थर वगैहर गिर गए हैं. इसी में भगदड़ मच गई. कई बच्चे घुटन से मर गए."

मंदिर पहाड़ी पर है. श्रद्धालु नीचे बने बस स्टैंड पर पैदल आते हैं, ये रास्ता टेढ़ा-मेढ़ा है. अगर भीड़ ज़्यादा हो श्रुद्धालुओं को बीच में रोक दिया जाता है. श्रद्धालु चार-छह घंटे से बैठे इंतज़ार कर रहे थे. किसी ने अफ़वाह फैला दी कि ऊपर से कुछ पत्थर वगैहर गिर गए हैं. इसी में भगदड़ मच गई. कई बच्चे घुटन से मर गए
पीसी अकेला

पुलिस अधिकारी विमल गुप्ता ने बताया है कि ये घटना सुबह 11 से साढ़े ग्यारह के बीच हुई और श्रावण अष्टमी होने के कारण भीड़ ज़्यादा थी. उन्होंने कहा कि वहाँ तेज़ बारिश भी होने लगी थी जिससे स्थिति बिगड़ गई.

नैनी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से करीब 150 कीलोमीटर दूर स्थित है.

मेला अधिकारी पीसी अकेला ने बताया, "अभी स्थिति नियंत्रण में है. कई हताहतों को आनंदपुर साहब के सिविल अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है. श्रद्धालु अभी मंदिर में आ-जा रहे हैं. "

श्रद्वालुओं की भीड़

 भीड़ बहुत ज़्यादा थी, कई यात्री आए हुए थे. दरअसल ऊपर से ये अफ़वाह आई कि पहाड़ गिर गया है, इसके बाद लोगों में अफ़रा-तफ़री मच गई. पुलिस ने डंडे मारे. जितने लोग थे-बच्चे बूढ़े सब एक-दूसरे के ऊपर गिर गए. किसी को मौक़ा ही नहीं मिला संभलने का- इतना भी संभव नहीं था कि अगर किसी का हाथ फँस गया था तो वो हाथ निकाल ले
प्रत्यक्षदर्शी

इस हादसे में अपनी पत्नी समेत परिवार के तीन लोगों को गँवा चुके एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "भीड़ बहुत ज़्यादा थी, कई यात्री आए हुए थे. दरअसल ऊपर से ये अफ़वाह आई कि पहाड़ गिर गया है, इसके बाद लोगों में अफ़रा-तफ़री मच गई. पुलिस ने डंडे मारे. जितने लोग थे-बच्चे बूढ़े सब एक दूसरे के ऊपर गिर गए. किसी को मौक़ा ही नहीं मिला संभलने का- इतना भी संभव नहीं था कि अगर किसी का हाथ फँस गया था तो वो हाथ निकाल ले."

प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक़ प्रशासन वाले मदद के लिए डेढ़ घंटे बाद पुहँचे और करीब दो घंटे बाद वहाँ से लाशें उठाई गई हैं.

बिलासपुर के मशहूर नैना मंदिर में बड़ी संख्या में लोग आते हैं. पुलिस के मुताबिक रोज़ाना करीब पचास हज़ार श्रद्धालुओं के आन की उम्मीद होती है लेकिन रविवार को श्रद्धालुओं की संख्या बहुत ज़्यादा थी.

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉक्टर अरुण कुमार ने बताया कि इस हादसे की जाँच मंडल आयुक्त से करवाने के आदेश दे दिए गए हैं.

उन्होंने बताया कि शवों को रोपड़ अस्पताल लाया जा रहा है. हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री भी रोपड़ पहुँच रहे हैं.

भारत में धार्मिक समारोहों के दौरान मंदिरों में भगदड़ मचने के कई मामले पहले भी हो चुके हैं. इसी महीने पुरी की रथयात्रा में मची भगदड़ से छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी.

इसी साल मार्च में मध्यप्रदेश के अशोकनगर ज़िले में एक मंदिर में दर्शन के दौरान हुई भगदड़ में कम से कम आठ लोग मारे गए थे जबकि जनवरी 2008 में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में स्थित एक मंदिर में सुबह भगदड़ मचने से पाँच लोगों की मौत हो गई थी.

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