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रथयात्रा में भगदड़, छह श्रद्धालुओं की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पुरी की रथयात्रा में शुक्रवार को मची भगदड़ में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई. इस भगदड़ में 11 श्रद्धालु घायल हुए हैं, उनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है जिन्हें इलाज के लिए कटक भेजा गया है. अन्य घायलों को पुरी के ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मरने वालों में तीन पुरुष और तीन महिलाएँ हैं. मृतकों में से दो की पहचान हो गई है. भगदड़ तब मची जब सुभद्रा की मूर्ति को रथ में रखा जा रहा था. इस दौरान उसे देखने के लिए वहाँ उपस्थित श्रद्धालुओं में धक्का-मुक्की शुरू हो गई. जिससे वहाँ भगदड़ मच गई. मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को एक लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है. घायलों के इलाज का ख़र्च भी राज्य सरकार उठाएगी. राज्य सरकार ने रथयात्रा के दौरान मची भगदड़ की जाँच राजस्व परिषद के सदस्य से कराने की घोषणा की है. रथयात्रा की परंपरा बारहवीं शताब्दी में बने पुरी के मंदिर से जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की मूर्तियों को तीन विशालकाय रथों में रखकर रथयात्रा निकाली जाती है. इस रथ को हज़ारों हिंदू श्रद्धालु खींचकर दो किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर तक ले जाते हैं. 12 दिन तक चलने वाले इस उत्सव के अंतिम दिन तीनों मूर्तियों को वापस जगन्नाथ मंदिर में रख दिया जाता है. जगन्नाथ को कृष्ण का अवतार माना जाता है. बलदेव उनके भाई हैं और सुभद्रा उनकी बहन. हर साल इस रथयात्रा में लगभग 7-8 लाख लोग भाग लेते हैं लेकिन इस साल उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में आई बाढ़ के कारण श्रद्धालुओं की संख्या काफ़ी कम है. बाढ़ के कारण पश्चिम बंगाल से आने वाली कई रेलगाड़ियाँ रद्द कर दी गई थीं, जो अभी तक बहाल नहीं हुई हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा27 जून, 2006 | भारत और पड़ोस पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगदड़04 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस रानी पहुँची पुरी के मंदिर में पूजा करने09 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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