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पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगदड़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उड़ीसा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर में दर्शनों के दौरान शनिवार सुबह भगदड़ मच गई. अधिकारियों का कहना है कि इस भगदड़ में चार लोगों की मौत हो गई और लगभग 25 अन्य लोग घायल हो गए हैं. इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है. भुवनेश्वर से पत्रकार संदीप साहू ने जानकारी दी है कि इन दिनों कार्तिक के विशेष दर्शन के लिए भारी भीड़ जुटती है. रविवार को कार्तिक पूर्णिमा है जिसके लिए हज़ारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पुरी में जमा हैं. इस दौरान रात भर दर्शन के लिए द्वार खुले रहते हैं लेकिन ऐसी जानकारी मिल रही है कि मंदिर प्रशासन ने शुक्रवार की रात मंदिर के प्रवेश द्वार बंद कर दिए. जबकि भारी भीड़ होने पर ये खुले रखे जाते हैं. इसकी वजह से सुबह दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई और सभी ने एक साथ घुसने की कोशिश की जिससे भगदड़ मच गई. विशेष बैठक बुलाई गई जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक और आईएएस अधिकारी सुरेश महापात्र ने जानकारी दी है कि शनिवार की शाम मंदिर समिति की विशेष बैठक बुलाई गई है जिसमें इस हादसे की कारणों पर चर्चा होगी.
बारहवीं शताब्दी के पुरी मंदिर से जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की मूर्तियों हैं. जगन्नाथ को कृष्ण का अवतार माना जाता है. बलदेव उनके भाई बलराम का दूसरा नाम है और सुभद्रा उनकी बहन है. इन तीनों की मूर्तियों को विशिष्ट माना जाता है क्योंकि ये तीनों मूर्तियाँ पारंपरिक रूप में नहीं हैं और माना जाता है कि वे आदिवासी रूप में हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा27 जून, 2006 | भारत और पड़ोस यात्रा के दौरान मोबाइल बंद | भारत और पड़ोस नारियल आपूर्ति के लिए कोरियर सेवा...04 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस कुंभ मेले में भगदड़ कई मरे | भारत और पड़ोस भारत में भगदड़ की घटनाएँ27 अगस्त, 2003 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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