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पाकिस्तान कराएगा दूतावास हमले की जाँच
मनमोहन और गिलानी
दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच बातचीत का मुख्य मुद्दा आतंकवाद रहा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने काबुल में जुलाई में भारतीय दूतावास पर हुए हमले की जाँच कराने का वादा किया है.

भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों ने श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की बैठक में मुलाक़ात की है.

सार्क की शिखर बैठक के दौरान आतंकवाद का मुद्दा छाया रहा और उसके बाद भारत-पाकिस्तान की द्विपक्षीय बैठक में भी यही मुद्दा रहा.

भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने इस बातचीत के बाद पत्रकारों को बताया कि "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है कि काबुल के धमाके की स्वतंत्र जाँच कराएँगे. वे इस बारे में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति करज़ई से भी बात करेंगे."

उल्लेखनीय है कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन इस हमले के बाद सीधे-सीधे आरोप लगा चुके हैं कि इसमें पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का हाथ था, यही बात अमरीकी समाचारपत्र न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी छापी है.

भारतीय विदेश सचिव के मुताबिक़ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अनुरोध किया है कि अगर भारत के पास कोई सबूत हो तो उसे ज़रूर उपलब्ध कराएँ ताकि जाँच में मदद मिल सके.

 पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है कि काबुल के धमाके की स्वतंत्र जाँच कराएँगे. वे इस बारे में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति करज़ई से भी बात करेंगे
शिवशंकर मेनन

शुक्रवार को मेनन ने कहा था कि भारत के पास कई सबूत हैं लेकिन वे बड़ी तस्वीर के छोटे-छोटे टुकड़े हैं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री गिलानी ने कहा कि उनके देश की सभी राजनीतिक पार्टियाँ भारत से मित्रता की पक्षधर हैं, इसके जवाब में भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की मंशा भी मित्रतापूर्ण संबंधों की है लेकिन हाल के दिनों में कई ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ हुई हैं जिनसे भारत को आघात लगा है.

इसके अलावा भारत के विदेश सचिव ने बताया कि पाकिस्तान को साफ़ तौर पर बता दिया गया है कि अगर संबंध चार साल पहले वाले स्तर तक लाने हैं तो नियंत्रण रेखा पर शांति स्थापित करनी होगी.

इस वर्ष जनवरी से लेकर अब जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर भारत के मुताबिक़ पाकिस्तानी सैनिक लगभग 20 बार गोलीबारी करके युद्धविराम का उल्लंघन कर चुके हैं.

भारतीय विदेश सचिव ने सीमा पार से होने वाली घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पाकिस्तान को इसे रोकने के लिए पूरे प्रयास करने चाहिए तभी संबंध बेहतर हो सकते हैं.

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