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वसुंधरा का मंदिर बनाए जाने पर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समर्थक अब जोधपुर ज़िले के एक गाँव में उनका मंदिर बनाकर उन्हें देवी के रूप मे स्थापित करना चाहते है. लेकिन इस पर विवाद उठ खड़ा हुआ है. ग्रामीण इस मंदिर का विरोध कर रहे है. दूसरी ओर मंदिर का विचार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भी गले नही उतर रहा है. जोधपुर के एक पुजारी हेमंत बोहरा ने अब मुख्यमंत्री का मन्दिर बनने का काम हाथ में लिया है. इस पर सवाल उठ रहा है कि ये किसी राजनेता के दैविक अवतरण मे देखने की भक्तों की उत्कंठा है या सियासत में व्यक्ति पूजा की बढ़ती प्रवृत्ति का परिचायक. इससे पहले बोहरा जोधपुर मे मुख्यमंत्री को अन्नपूर्ण देवी के रूप मे दिखने वाला एक रंगीन कैलेंडर प्रकाशित कर चुके है जिसमें वे देवी रूप में विराजमान थीं. इसमें अटल, अडवाणी, राजनाथ सिंह ब्रह्मा, विष्णु और महेश की त्रिमूर्ति के रूप में मौजूद थे. इस पर काफ़ी बावेला मचा था और मामला अदालत तक जा पहुँचा था. मगर अब बोहरा अब उस देवी को एक भव्य मन्दिर में स्थापित करना चाहते हैं. बोहरा कहते है,'' ये मंदिर उनके निजी भूखंड पर जोधपुर से 20 किलोमीटर दूर बेरू गाँव में बनेगा.'' विरोध लेकिन इसके विरोध में गाँव के विश्नोई समुदाय के लोग उठ खड़े हुए है. उनका कहना है कि प्रस्तावित जमीन उनके समुदाय का श्मशान है और वहाँ मंदिर नहीं बनाने देंगे और अब ये मामला पुलिस तक जा पहुँचा है. मुख्यमंत्री के इस आराधक बोहरा का कहना है कि उन्होंने वसुंधरा राजे की दुर्गा स्वरूप मूर्ति के लिए मूर्तिकारों से बात कर ली है. मंदिर दक्षिण शैली का होगा और उसमे मुख्यमंत्री के कोई चार फ़ुट ऊँची मूर्ति विधिविधान से स्थापित की जाएगी. इस गाँव के विश्नोई समुदाय ने घोषणा की है कि ऐसा कोई मंदिर उस जमीन पर नहीं बनने दिया जाएगा. बेरू के मालाराम विश्नोई कहते है,'' ये जगह हमारे पारंपरिक बही खातों में श्मशान के बतौर दर्ज है. वहां समाधियाँ भी बनी हुई हैं.'' पुजारी और गाँववालों के इस विवाद से दूर सत्तारूढ़ भाजपा ने इस पूरे विवाद पर मौन साध रखा रहा है. वैसे तो भाजपा व्यक्ति पूजा का विरोध करती रही है, पर यहाँ वो खामोश है. लेकिन आरएसएस को मंदिर का ये विचार रास नही आया है. राज्य में आरएसएस के प्रवक्ता कन्हैयालाल चतुर्वेदी कहते हैं,'' किसी इंसान को मंदिर में देवी-देवता के रूप मे स्थापित करने का विचार किसी को भी रास नही आएगा. लेकिन ये चापलूसी का दौर है, पूरे कुएँ में ही भाँग पड़ी हुई है.'' उनका कहना था,'' कांग्रेस के लोग हर चीज के साथ इंदिरा गाँधी या राजीव गाँधी का नाम जोड़ देते है तो बिहार में लालू की जीवनी पाठ्यक्रम में शामिल की गई.ये सब ठीक नहीं है.'' भारत में धर्म और राजनीति की जुगलबंदी कोई नई नहीं है. लेकिन अब सियासत उस मुकाम तक जा पहुँची है जहाँ राजनेता मंदिर और देवालयों में अपने मूर्तियाँ देखकर खुश होना चाहते हैं. |
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