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स्वयंवर में चुना अन्नपूर्णा ने ‘राम’ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पुरानी कहानियों और धर्मग्रंथों में तो स्वयंवर के ढेरों किस्से मिलते हैं लेकिन 21वीं सदी में भी छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले में एक स्वयंवर हुआ, जिसमें 22 साल की अन्नपूर्णा ने अपने वर के रुप में घनाराम नामक युवक का चयन किया. हल्बा आदिवासी समुदाय की अन्नपूर्णा के स्वयंवर के लिए पिछले महीने भर से तैयारी चल रही थी और पूरे इलाक़े में इस स्वयंवर के लिए पोस्टर चिपकाए गए थे. घूम-घूम कर लाउडस्पीकर से लोगों को इस स्वयंवर की जानकारी दी जा रही थी. अपनी तरह के इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए दुर्ग ज़िले के एक छोटे से गांव घुमका में मंगलवार को मेले जैसा माहौल था. अनुमान है कि कोई पाँच हज़ार लोग इस स्वयंवर को देखने पहुँचे थे और भीड़ को संभालने के लिए स्थानीय प्रशासन को पुलिस की व्यवस्था करनी पड़ी. शर्तें हर स्वयंवर की तरह इस स्वयंवर की अपनी शर्तें थीं.
इसमें शामिल होने वाले युवकों को अन्नपूर्णा के पाँच धार्मिक सवालों का जवाब देना था. इसके अलावा शर्त रखी गई थी कि इस स्वयंवर में हल्बा आदिवासी समाज के युवक ही भाग ले सकेंगे. 22 साल की अन्नपूर्णा ने आठवीं तक की पढ़ाई की है और उन्होंने स्वयंवर में शामिल होने वाले युवाओं की अधिकतम आयु 26 साल तय कर रखी थी. हालांकि स्वयंवर की घोषणा के बाद हल्बा आदिवासी समाज का एक बड़ा धड़ा इस तरह के आयोजन के ख़िलाफ़ हो गया था लेकिन बाद में स्वयंवर से पहले चले चार दिवसीय रामचरित मानस यज्ञ के दौरान यह विरोध ठंडा पड़ गया और समाज के साथ-साथ गाँव के लोग भी इस आयोजन में सक्रिय हो गए. स्वयंवर को लेकर भारी उत्सुकता थी लेकिन हल्बा आदिवासी समाज के कुल तीन युवकों ने ही इस स्वंयवर में हिस्सा लिया. सवाल-जवाब का सिलसिला शुरु हुआ और पंच तत्व यानी 'क्षिति जल पावक गगन समीरा' को लेकर पाँच सवाल अन्नपूर्णा ने पूछे. 25 साल के घनाराम ने अन्नपूर्णा के सवालों का सही-सही जवाब देकर अन्नपूर्णा को पा लिया. घनाराम ने 12 वीं तक की पढ़ाई की है और पेशे से किसान है. विरोध के बावजूद इस आधुनिक युग में स्वयंवर का ख्याल कैसे आया? इस सवाल के जवाब में बेहद धार्मिक ख्यालों वाले अन्नपूर्णा के पिता रामरतन ठाकुर कहते हैं, “मेरे मन में ख़याल आया कि जब पुराने जमाने में स्वयंवर हो सकता है तो अभी क्यों नहीं? मैंने धार्मिक परंपरा का पालन किया.” चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारी रामरतन ठाकुर के अनुसार जब उन्होंने अपनी बेटी के ब्याह के लिए स्वयंवर के आयोजन के लिए आदिवासी समाज की बैठक बुलाई तो समाज के लोगों ने इस तरह के आयोजन का विरोध किया. लेकिन रामरतन ठाकुर ने समाज की नहीं सुनी. अपने पिता के धार्मिक विचारों से सहमति दर्शाने वाली अन्नपूर्णा स्वयंवर के आयोजन को महिला शक्ति से भी जोड़ती हैं. वे कहती हैं, “कोई लड़की अपने मन से वर क्यों नहीं चुन सकती? जब पुराने ज़माने में लड़कियों को यह छूट थी कि वह अपने लिए योग्य वर चुन सके तो अब क्यों नहीं?” अन्नपूर्णा के इस स्वंयवर में चुने गए घनाराम अपने घर से दो सौ रुपए लेकर चले थे. घनाराम ने संभावित सवालों के जवाब के लिए कुछ नोट्स भी बनाए थे लेकिन उन्हें लगता था कि मुक़ाबला मुश्किल होगा. घर से मां-पिता का आशीर्वाद लेकर निकले घनाराम कहते हैं, “मैंने तो सोचा कि क़िस्मत आजमा कर देखने में क्या हर्ज़ है. मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं स्वयंवर में चुन लिया जाउँगा.” हालांकि शादी की तारीख अभी तय नहीं हुई है लेकिन अपनी बेटी के स्वयंवर से बेहद उत्साहित अन्नपूर्णा के पिता रामरतन ठाकुर को उम्मीद है कि विवाह के दिन और भीड़ उमड़ेगी. पहले इस आयोजन का विरोध करने वाले हल्बा समाज के नेता भी इस आयोजन से खुश हैं. गांव के एक युवक कहते हैं-“ अभी तो शुरुआत हुई है. आप देखते जाइए, अब तो हमारे इलाक़े में स्वयंवर की कतार लगेगी.” |
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