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शादी का घपला रोकने के लिए क़ानून? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भारत में आकर शादी करने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए कड़े क़ानून बनाने की सिफ़ारिश की है. आयोग ने ये सिफ़ारिश प्रवासी भारतीयों की धोखाधड़ी की शिकायतों के बाद की है. शिकायतें हैं कि भारतीय युवक यहाँ आकर शादी करते हैं, भारी भरकम दहेज लेते हैं और फिर नवविवाहिता को यहीँ छोड़कर फिर विदेश लौट जाते हैं. एक अनुमान है कि भारत में इस समय ऐसी कोई 50 हज़ार महिलाएँ रह रही हैं जिसे उनके पतियों ने विदेश ले जाने का आश्वासन देकर शादी की थी. और इनमें से आधी तो पंजाब की हैं. राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने कहा है कि आयोग केंद्र सरकार से ऐसी महिलाओं और उनके परिवारजनों का शोषण और उत्पीड़न रोकने के लिए एक क़ानून बनाने की सिफ़ारिश करेगा. प्रवासी भारतीय के विवाह की समस्याएँ विषय पर आयोजित दो दिनों की कार्यशाला को संबोधित करते हुए गिरिजा व्यास ने कहा कि प्रवासी भारतीयों सहित सभी विवाह का पंजीकरण आवश्यक होना चाहिए.
उनका कहना था कि भारत आकर विवाह करने वाले युवक के पासपोर्ट पर पत्नी की भी तस्वीर लगाने जैसे विशेष प्रावधान भी किए जाने चाहिए. महिला आयोग की अध्यक्ष का कहना था कि विवाह करके विदेशों में लापता हो जाने वाले भारतीयों की तलाश के लिए सभी भारतीय दूतावासों और उच्चायोग में विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किए जाने चाहिए. उन्होंने स्वीकार किया कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, केरल और आँध्रप्रदेश जैसे कई भारतीय राज्यों में इस तरह की घटनाएँ सामान्य हो चली हैं. उनका कहना था कि पश्चिम के देशों में जाकर बसने की इच्छा में इस तरह के विवाह में फँसने जाने वाली कम से कम 15 हज़ार युवतियाँ तो पंजाब में ही हैं. इस कार्यशाला में इस बात की भी सिफ़ारिश की गई कि भारत को प्रवासियों के विवाह संबंधी विवाद सुलझाने की संधि में शामिल होना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें राजस्थान में विवाह का पंजीकरण ज़रुरी24 मई, 2006 | भारत और पड़ोस अब शादी का पंजीकरण होगा आवश्यक14 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस प्रवासी भारतीयों को स्मार्ट कार्ड मिलेगा09 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस प्रवासी भारतीय सम्मेलन में विवाद09 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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