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'सत्तर की उम्र' में जुड़वाँ बच्चे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरप्रदेश में सत्तर साल की बताई जाने वाली एक महिला ने आईवीएफ़ तकनीक से किए गए इलाज के बाद जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया है. इस तकनीक में अंडाणुओं का निषेचन महिला के अंडाशय से बाहर ही कृत्रिम रूप से कराया जाता है. ओमकारी पंवार के पास कोई जन्म प्रमाणपत्र नहीं है लेकिन उनकी बताई इस उम्र को प्रमाणित कर दिया जाए तो वे सबसे ज़्यादा उम्र में माँ बनने का विश्व रिकार्ड बना सकती हैं. एक लड़के और एक लड़की के रूप में उनके जुड़वाँ बच्चों का वजन दो-दो पाउंड है और वे ऑपरेशन के माध्यम से नियत समय से एक महीने पहले पैदा हुए हैं. यह दंपत्ति अपने बेटे के लिए इतना उतावला था कि उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई इसमें लगाने के अलावा आईवीएफ़ इलाज कराने के लिए बैंक से ऋण भी लिया. ईश्वर का आशीर्वाद ओमकारी पंवार के इससे पहले दो लड़कियाँ और हैं और वह पाँच बच्चों की नानी भी हैं. ओमकारी का कहना है, "हमारे पास दो लड़कियाँ तो हैं लेकिन हम लड़का चाहते थे जो हमारी संपत्ति का ख्याल रख सके. यह जुड़वाँ बच्चे भगवान का आशीर्वाद हैं." अपनी उम्र के सत्तरवें दशक में चल रहे जुड़वाँ बच्चों के पिता चरम सिंह ने बताया कि वे बहुत खुश हैं. उन्होंने कहा, "एक बेटे की चाहत तो हमें हमेशा थी लेकिन ईश्वर ने हमें बेटा नहीं दिया था. अब हम ईश्वर के शुक्रगुज़ार हैं कि उन्होंने हमें हमारी प्रार्थनाओं के बदले यह उपहार दिया है." डॉक्टरों का कहना है कि जुड़वाँ बच्चे ठीक-ठाक हैं. ओमकारी बताती हैं कि 1947 में जब अंग्रेज़ भारत छोड़ कर गए थे तब वह नौ वर्ष की थीं. इससे यह अंदाज़ लगता है कि वे अब सत्तर वर्ष की हैं. दिसंबर 2006 में बर्सिलोना में एक स्पेनिश महिला ने 67 की उम्र में जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया था जबकि भारत के उड़ीसा राज्य में एक महिला ने 65 की उम्र में एक लड़के को जन्म दिया था. |
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