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सोमवार, 23 फ़रवरी, 2004 को 19:12 GMT तक के समाचार
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एक बस्ती जुड़वाँ लोगों की

मोहम्मदपुर उमरी के जुड़वाँ
जुड़वाँ बच्चों के बारे में वैज्ञानिकों की धारणा को ग़लत ठहरा दिया है मोहम्मदपुर उमरी ने
सोचिए, अगर आपको एक कतार से जुड़वाँ लोग मिलने लगें और वह भी एक ही बस्ती में, तो?

यह कोई मज़ाक़िया सवाल नहीं है, वास्तव में एक स्थान लगभग ऐसा ही है और वह भी भारत में.

वहाँ पैदा हो रहे हर 10 बच्चों में एक जुड़वाँ होते हैं और वे भी अधिकतर हमशक्ल.

अगर आप वैज्ञानिक चमत्कार वाली फ़िल्म बनाना चाहें, तो आपको वहाँ अच्छा मसाला मिल सकता है.

यह स्थान है इलाहाबाद के पास का मोहम्मदपुर उमरी गाँव, जो इस तथ्य को झुठला रहा है कि विश्व भर में पैदा होने वाले 300 बच्चों में कोई एक जोड़ी बच्चे हमशक्ल होते हैं.

मोहम्मदपुर उमरी के मुखिया 70 वर्षीय नेताजी बताते हैं कि पिछले 10-15 वर्षों के दौरान यहाँ जुड़वाँ बच्चों के जन्म में वृद्धि हुई है.

वे कहते हैं, हमशक्ल जुड़वाँ बच्चे तो यहाँ और भी दिखाई देते, लेकिन कई बच्चों की पैदा होते ही मौत हो जाती है.

वैज्ञानिकों के लिए अजूबा

छह महीने पहले जबसे एक स्थानीय दैनिक ने यह समाचार प्रकाशित किया है, तबसे वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय मीडिया वाले इस अज्ञात-से गाँव में उमड़े चले आ रहे हैं.

इनमें हैदराबाद स्थित सेंटर फ़ॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायॉलोजी के डी.एन.ए. विशेषज्ञ भी हैं.

वे मोहम्मदपुर उमरी के निवासियों के ख़ून के नमूने जमा कर रहे हैं. उनके लिए यह किसी वैज्ञानिक ख़ज़ाने से कम नहीं है.

हमशक्ल जुड़वाँ बच्चे तब पैदा होते हैं, जब एक ही डिम्ब का निषेचन होता है, जबकि अलग शक्ल वाले जुड़वाँ बच्चे माता के दो डिम्बों का एक साथ निषेचन होने पर पैदा होते हैं.

यह संयोग की बात है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी होते हैं, यह विषय वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली ही बना हुआ है.

शायद डी.एन.ए. के विशेषज्ञ मोहम्मदपुर उमरी के निवासियों के ख़ून से इस पहेली को हल कर सकें.

वे यह खोजने में लगे हुए हैं कि क्या इसका कोई जेनेटिक आधार होता है या भ्रूणावस्था में बनने वाले डी.एन.ए. के समीकरण इसके लिए उत्तरदायी हैं.

रिश्तेदारी में शादी

मोहम्मदपुर उमरी मुस्लिम बहुल गाँव है, जहाँ नज़दीक़ी रिश्तेदारों में शादी होना आम बात है.

कहीं इन हमशक्ल जुड़वाँ बच्चों के जन्म का कारण रिश्तेदारी में शादियाँ होना तो नहीं है?

अगर ऐसा है, तो पूछा जा सकता है कि अन्य मुस्लिम बहुल स्थानों में हमशक्ल जुड़वाँ क्यों पैदा नहीं होते?

अपनी जन्मभूमि का गुणगान करने वाले एक राजनीतिक नेता कहते हैं, ''जनाब, यह गंगा और यमुना नदियों के बीच की उपजाऊ भूमि है, इस कारण यहाँ ऐसा होता है. देखिए, यहाँ गन्ना भी किस बहुतायत से उगता है.''

उनके साथी ग्रामवासी भी इस बात से सहमत दिखाई देते हैं और कहते हैं, ''यह तो अल्ला की मेहरबानी है.''

अनोखे जुड़वाँ बच्चे

मोहम्मदपुर उमरी के 20 वर्षीय अबू साद के आठ भाई-बहन हैं और उनमें उनकी चार बहनें हमशक्ल जुड़वाँ हैं.

हैदराबाद के डी.एन.ए. विशेषज्ञों की राय में ऐसा बहुत कम देखने में आया है.

लेकिन सबसे बढ़कर विख्यात हो रहे हैं यहाँ के दो जुड़वाँ भाई गुड्डू और मुन्नू.

गुड्डू कहते हैं, मेरी तो पत्नी तक अक्सर धोखा खा जाती है.

उन्होंने एक क़िस्सा सुनाया, ''एक बार मुन्नू का किसी पड़ोसी से झगड़ा हो गया, लेकिन पुलिस मुझे पकड़ कर ले गई, क्योंकि मैंने अपने भाई जैसे सफ़ेद कपड़े पहने हुए थे. मेरे ख़ुद को निर्दोष बताने पर पुलिस को विश्वास ही नहीं होता था. कई घंटे बाद बड़ी मुश्किल से पुलिस को मेरी बात पर यक़ीन आया.''

मोहम्मदपुर उमरी के पास ही एक मुस्लिम मदरसा है और जैसा कि अक्सर होता है, वहाँ के जुड़वाँ बच्चे भी एक-जैसे कपड़े पहनकर स्कूल आते हैं.

अध्यापकों के लिए कभी-कभी उनमें अंतर करना बड़ा कठिन हो जाता है.

सोचिए, अगर कोई बच्चा शैतानी करे या होमवर्क करके न लाये और अध्यापक क़ुसूरवार को पहचान न सके, तो क्या हो?

उसके जुड़वाँ भाई या बहन को उसका हमशक्ल होना वाकई बहुत महँगा पड़ेगा.

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