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करिश्मे से कम नहीं ये जुड़वाँ बच्चे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
समय से पहले हुए पैदा हुए जुड़वाँ बच्चों ने बहुत कम उम्मीद होते हुए भी जीवित बचकर लोगों को हैरत में डाल दिया है. अचंभे वाली बात ये है कि इन जुड़वाँ बच्चों में से एक तीन गुना बड़ा और भारी है. बड़े बच्चे का वज़न क़रीब डेढ़ किलोग्राम है और उसका आकार भी छोटे वाले से तीन गुना बड़ा है. छोटे वाले बच्चे लिंकन राइमन का वज़न क़रीब 530 ग्राम है और वह पैदाइश के सही समय से 11 सप्ताह पहले ही इस दुनिया में आ गया. साथ में उसका भाई बारॉन भी दुनिया में आया लेकिन वह उससे तीन गुना बड़ा नज़र आ रहा था, जैसाकि आप तस्वीर में देख सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में रॉयल अस्पताल में डॉक्टरों ने जब देखा कि यह मामला कुछ उलझा हुआ सा लगता है तो उन्होंने समय से पहले ही इन बच्चों को जन्म दिलाना बेहतर समझा. पेचीदगी ये थी कि छोटे बच्चे लिंकन राइमन में से रक्त बाइरॉन में जा रहा था जिससे दोनों का ही जीवन बहुत ख़तरे में था. उनकी माँ निकोल को बेहद ख़तरनाक हालात का सामना करने के लिए तैयार रहने को कह दिया गया था और फ़ैसला किया गया कि जच्चा-बच्चा को ख़तरे से बचाने के लिए 29वें सप्ताह में ही बच्चों को जन्म दिला दिया जाए. हालाँकि सामान्य पैदाइश 36 से 38 सप्ताह के बीच होती है. डॉक्टरों का कहना था कि छोटे वाले बच्चे लिंकन रायमन के जीवित बचने की संभावना काफ़ी कम थी क्योंकि वह बहुत छोटा है और उसका वज़न भी काफ़ी कम है. उसके दिल का ऑपरेशन किया गया और इन तमाम ख़तरों और नाज़ुक हालत के बावजूद वह भी अपने भाई बाइरॉन की ही तरह ज़िंदगी को महसूस कर रहा है. सपना सच हुआ निकोल और उनके पति टॉड का कहना था कि माता-पिता बनने का पहला सप्ताह उनके लिए काफ़ी झटकों वाला रहा है लेकिन उत्साहजनक भी.
निकोल रायमन का कहना था, "हमें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे कि दुनिया मिल गई हो क्योंकि यह हमारे लिए एक सपना भर ही था कि हम कभी इस तरह के बच्चों के माता-पिता बन पाएंगे." निकोल यह कहते हुए फूली नहीं समा रही थीं कि बीच-बीच में वह काफ़ी डरती भी रहीं कि क्या होगा लेकिन अब सबकुछ ठीक लग रहा है और वह यह सोचकर काफ़ी उत्साहित नज़र आती हैं कि दोनों बच्चों को जल्दी ही घर ले जा सकेंगी. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि बायरॉन को तो वह अगले सप्ताह ही घर ले जा सकेंगी मगर लिंकन को अभी लगभग एक महीने तक सघन चिकित्सा में रखना होगा और जब तक वह सामान्य न हो जाए, अस्पताल ही उसका घर होगा. इन अदभुत हिम्मत वाले जुड़वाँ बच्चों की देखभाल करने वाले डॉक्टर पराग मीशा का कहना था, "लिंकन के जीने की संभावना हमने सिर्फ़ इसलिए तीस प्रतिशत बताई थी कि उसका वज़न बहुत कम है. उम्मीद है कि जल्दी ही उसका वज़न बढ़ना शुरू हो जाएगा और वह भी अपने भाई की ही तरह हट्टा-कट्टा होकर अपने घर जा सकेगा." | इससे जुड़ी ख़बरें जुड़वाँ भाइयों की मदद करेंगे जुडवाँ भाई06 जून, 2005 | भारत और पड़ोस दुनिया की सबसे छोटी बच्ची है रुमैसा22 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना एक बस्ती जुड़वाँ लोगों की23 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस जुड़वाँ भाइयों की पहली मुलाक़ात26 अक्तूबर, 2003 | विज्ञान 'हम तो ऐसे ही ख़ुश हैं' | भारत और पड़ोस अलग होकर तो लौटीं लेकिन. . .10 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना बहनों का अंतिम संदेश08 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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