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जुड़वाँ भाइयों की मदद करेंगे जुडवाँ भाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयोग शायद इसी को कहते हैं. पश्चिम बंगाल में उत्तर 24-परगना ज़िले के जुड़वां भाइयों रजत और राकेश में बाक़ी सभी समानताएँ तो हैं ही, अब हाल में हुई हाईस्कूल की परीक्षा में भी समान अंक हासिल कर दोनों ने सबको हैरत में डाल दिया है. पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इस परीक्षा में कुल 800 में से 577 अंक हासिल कर दोनों पहली श्रेणी में पास हुए हैं. ठीक 45 साल पहले अन्य जुड़वां भाइयों असीम और अतीश दासगुप्ता ने भी हाईस्कूल में समान अंक हासिल कर जिले में पहला स्थान हासिल किया था. इनमें से असीम दासगुप्ता इस समय राज्य के वित्त मंत्री हैं और उनके भाई अतीश जाने-माने शिक्षाविद्. अब दासगुप्ता बंधुओं ने रजत और राकेश की सहायता करने का फैसला किया है ताकि वे डॉक्टर बनने का अपना लक्ष्य हासिल कर सकें. सपना रजत सरकार और राकेश सरकार के घर की माली हालत ठीक नहीं है.पिता गणेश सरकार खेती करते हैं लेकिन उससे छह लोगों के परिवार की रोजी-रोटी नहीं चलने के कारण रजत और राकेश को दूसरे के खेतों में मजदूरी करनी पड़ती है. वर्ष 1990 में तीन घंटे के अंतर पर पैदा होने वाले इन भाइयों के कामकाज और स्वभाव में अद्भुत समानता होने के कारण उनके गांव चौगाछा के लोग उनको ‘राम-लक्ष्मण’ के नाम से पुकारते हैं. वे साथ पढ़ते हैं, खेलते हैं और साथ ही घूमने जाते हैं. रजत कहता है कि “परीक्षा के लिए मेहनत तो की थी लेकिन इतने बढ़िया नंबर मिलेंगे, यह नहीं सोचा था. मेरे भाई को भी समान नंबर मिलना आश्चर्यजनक है.” राकेश भी कहता है कि “परीक्षा का नतीजा देखकर उसे भी आश्चर्य हुआ. लेकिन जब बाकी चीजें मिलती हैं तो समान नंबर पाना स्वाभाविक ही है.” वे दोनों आगे डॉक्टर बनना चाहते हैं. लेकिन चिंता है इसमें होने वाले भारी खर्च की. दोनों कहते हैं कि “डाक्टर बन गए तो गांव में ही रह कर लोगों की सेवा करेंगे.” सफलता परीक्षा का नतीजा निकलने के बाद उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा था. लेकिन दोनों भाई आम दिनों की तरह उस दिन भी खेतों में जाने की तैयारी कर रहे थे.
उनके स्कूल चौगाछा मॉडल अकादेमी के शिक्षक भी काफी खुश हैं. एक शिक्षक कहते हैं कि “दोनों में से अगर एक को गणित का कोई सवाल नहीं आता था तो दूसरा उसे हल कर देता था. दोनों पढ़ाई में एक-दूसरे की सहायता करते थे. उन्होंने बिना किसी प्राइवेट ट्यूशन के ही इतने अंक हासिल किए हैं.” इन दोनों भाइयों ने वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता से फोन पर बातचीत की है. मंत्री कहते हैं कि “मैंने अपने भाई अतीश के साथ मिल कर इन दोनों भाइयों की सहायता करने का फैसला किया है. फोन पर बातचीत में मैंने उनको खर्च की चिंता छोड़कर 12वीं की पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा है.” अपने बेटों के इस कारनामे से पिता गणेश सरकार भी उत्साहित हैं. वे कहते हैं कि “मैं अपना सब कुछ बेचकर भी उन लोगों को डाक्टरी पढ़ाऊंगा.” अब रजत और राकेश के गाँव वालों ने भी उनको आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है. |
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