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अब बाँझपन के इलाज के लिए भी कर्ज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बलाई गिरी व उनकी पत्नी सुचेतना के दस वर्षों के वैवाहिक जीवन में अब उम्मीद की एक नई किरण नज़र आई है. कई जगह इलाज कराने के बावजूद उनको कोई संतान नहीं थी. चिकित्सकों ने टेस्ट ट्यूब बेबी की सलाह दी थी. लेकिन साफ्टवेयर इंजीनियर बलाई के पास इतना पैसा नहीं था कि वे ये तरीक़ा अपना पाते. लेकिन अब कोलकाता के एक क्लीनिक और एक बहुराष्ट्रीय बैंक के बीच तालमेल ने उनकी मुश्किलों को सहसा आसान कर दिया है. अब जल्दी ही उनको आसान ब्याज़ दरों पर तीन लाख का कर्ज मिल जाएगा और सुचेतना को उम्मीद है कि अब जल्दी ही उसकी गोद भर जाएगी. आसान कर्ज़ कोलकाता के फर्टिलिटी क्लीनिक जेनोम और हांगकांग शंघाई बैंकिंग कार्पोरेशन (एचएसबीसी) ने संतानहीन दंपतियों के इलाज के लिए आसान दरों पर कर्ज मुहैया कराने की खातिर एक करार पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे बलाई व सुचेतना जैसे निराश जोड़ों के जीवन में उम्मीद की एक नई किरण पैदा हुई है.
कोलकाता के भागीरथी नेवटिया वुमेन एंड चाइल्ड केयर सेंटर और इसरायल के हर्जिलिया मेडिकल सेंटर ने मिलकर इस नए क्लीनिक की स्थापना की है. दावा किया गया है कि इलाज के लिए कर्ज लेने की प्रक्रिया बहुत आसान है और ब्याज़ दर भी कम रखी गई है. इच्छुक लोगों को अपना आय प्रमाणपत्र लेकर क्लीनिक में जाना होगा और वहां जांच के बाद एक प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा जिसमें इलाज पर होने वाले खर्च का ब्यौरा लिखा होगा. इसी ब्यौरे के आधार पर बैंक कर्ज़ की रकम का फैसला करेगा. क्लीनिक की निदेशक मधु नेवटिया कहती हैं, "इस क्लीनिक में विदेशों में बसे कोलकाता के लोगों के इलाज के लिए आने की उम्मीद है." वे कहती हैं, "बाँझपन के इलाज का खर्च 50 हज़ार से पांच लाख रुपए तक हो सकता है. ऐसे में बैंक के कर्ज़ के कारण ऐसे जोड़ों को काफी सहूलियत हो जाएगी." व्यवसाय या समाज सेवा संतान की प्रतीक्षा कर रही जोड़ों को इससे लाभ होगा इसमें कोई संदेह नहीं लेकिन क्या यह व्यवसाय बढ़ाने का ही एक तरीक़ा नहीं है, इस सवाल पर मधु नेवटिया कहती हैं "बैंक के साथ इस करार की वजह व्यापारिक नहीं सामाजिक है." वे बताती हैं, "देश में चिकित्सा बीमा के क्षेत्र में काम कर रहीं कंपनियाँ संतानहीनता के इलाज का खर्च नहीं देतीं. हमने बीमा नियामक प्राधिकरण के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया था. विदेशों में इसका प्रावधान है. लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला इसलिए बैंक के साथ करार किया गया ताकि आम लोग भी एकमुश्त कर्ज लेकर संतानहीनता का इलाज करा सकें." लेकिन क्या गरीबों के लिए भी कोई व्यवस्था है? इसके जवाब में नेवटिया कहती हैं कि यहां कीमतें काफ़ी कम रखी गई हैं. व्यावसायिक लाभ के सवाल पर एचएसबीसी के पूर्वी भारत के प्रमुख येंटेन लामा भी कहते हैं कि ‘बैंक ने अपने सामाजिक दायित्व के तहत यह करार किया है'. | इससे जुड़ी ख़बरें मुआवज़ा बढ़ाने पर विचार16 नवंबर, 2004 | विज्ञान 21 साल पुराने शुक्राणु से पैदा हुआ बच्चा25 मई, 2004 | विज्ञान प्रयोगशाला में बने शुक्राणु से भ्रूण11 दिसंबर, 2003 | विज्ञान टेस्ट ट्यूब बेबी 25 की हुई25 जुलाई, 2003 | विज्ञान 'कॉफ़ी से शुक्राणुओं की सक्रियता बढ़ती है'14 अक्तूबर, 2003 को | विज्ञान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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