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मंगलवार, 16 नवंबर, 2004 को 14:00 GMT तक के समाचार
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मुआवज़ा बढ़ाने पर विचार
शुक्राणु
शुक्राणुदाताओं को ज़्यादा मुआवज़ा दिया जाएगा
ब्रिटेन में शुक्राणु और अंडाणुदाताओं को पहले के मुक़ाबले कई गुणा ज़्यादा पैसा दिए जाने के प्रस्तावों पर विचार चल रहा है.

मानव निषेचन और भ्रूणविज्ञान परिषद इस बात पर विचार कर रही है कि दाताओं की कमी को दूर करने के लिए किस तरह से उन्हें दी जाने वाली रक़म तय की जाए.

अब तक अंडाणुदाताओं को लगभग 1200 रुपये और कुछ दूसरे ख़र्चों के लिए भी भुगतान किया जाता है, लेकिन परिषद अब उनके लिए लगभग 80,000 रुपए देने पर विचार कर रही है.

जबकि शुक्राणु दाताओं को लगभग 4000 रुपए दिए जाते हैं लेकिन पुरुष दाता छह महीने के दौरान 50 बार तक शुक्राणु दान कर सकते है.

 शुक्राणुदाताओं की तुलना में अंडाणुदाताओं का काम वैज्ञानिक दृष्टि से काफ़ी कठिन है.यह काम दर्द से भरा, तनावपूर्ण और जोख़िम भरा है
सूज़ी लैदर

परिषद की अध्यक्ष सूज़ी लैदर का कहना है कि “शुक्राणुदाताओं की तुलना में अंडाणुदाताओं का काम वैज्ञानिक दृष्टि से काफ़ी कठिन है.यह काम दर्द से भरा, तनावपूर्ण और जोख़िम भरा है ”.

उनका कहना है कि कई उपचारगृहों और अंडाणुदाताओं ने परिषद से अधिक मुआवज़ा देने पर विचार करने को कहा है.

दाताओं की कमी

उनका आगे कहना है कि अप्रैल में जब दाता की पहचान ज़ाहिर किये जाने वाला क़ानून लागू हो जाएगा, तो दाताओं की भारी कमी हो जाएगी.

सूज़ी लैदर के अनुसार “ब्रिटेन में अबतक लगभग 37,000 बच्चे दान दिए गए अंडाणुओं, शुक्राणुओं और भ्रूणों की मदद से पैदा हुए हैं, लेकिन हमारी खोजबीन बताती है कि चिकित्सालयों को उपयुक्त और इच्छुक दाताओं की कमी महसूस हो रही है”.

वो मानती हैं कि “क़ानून में आने वाले बदलाव नई चुनौतियाँ और नए सवाल खड़े करते हैं, और यह बेहद ज़रुरी है कि लोग अपने विचारों को सामने रखें, ख़ासतौर से वो लोग जिनका जन्म दाता भ्रूणों, शुक्राणुओं या अंडाणुओं से हुआ है”.

अगर दाताओं को दी जाने वाली रक़म में बढ़ोतरी होती है तो ऐसा संभव है कि चिकित्सालय इन ख़र्चों का भार संतान चाहने वाले ज़रुरतमंद दम्पतियों पर डाल दें.

अनुचित मापदंड

एक राष्ट्रीय ट्रस्ट की अध्यक्ष लौरॉ स्पोएलस्ट्रा का मानना है कि “इस समय कई दाताओं को आर्थिक रुप से नुक्सान उठाना पड़ रहा है. अंडाणु और शुक्राणुदाताओं को एक ही पलड़े में रखना सही नहीं है “.

 शुक्राणुदाताओं को एक साल में लगभग 40,000 रुपए दिए जाते हैं जबकि महिला अंडाणुदाताओं को एक बार में केवल 1200 रुपए ही मिलते हैं. यह अनुचित है. जहाँ शुक्राणुदाताओं के लिए इस काम में कोई जोखिम नहीं होता वहीं अंडाणुदाताओं की सेहत पर इसके तात्कालिक बुरे प्रभाव तो पड़ते ही हैं भविष्य में प्रजनन शक्ति पर भी इसका असर पड़ता है
लॉरा स्पोएलस्ट्रा

उनका कहना है कि “शुक्राणुदाताओं को एक साल में लगभग 40,000 रुपए दिए जाते हैं जबकि महिला अंडाणुदाताओं को एक बार में केवल 1200 रुपए ही मिलते हैं. यह अनुचित है. जहाँ शुक्राणुदाताओं के लिए इस काम में कोई जोखिम नहीं होता वहीं अंडाणुदाताओं की सेहत पर इसके तात्कालिक बुरे प्रभाव तो पड़ते ही हैं भविष्य में प्रजनन शक्ति पर भी इसका असर पड़ता है ”.

लदंन स्त्रीरोग व निषेचक केंद्र के निदेशक प्रोफेसर इयान क्राफ्ट ने बी.बी.सी. फाइव-लाइव चैनल से बात करते हुए कहा कि वो नहीं चाहते कि दाताओं को अधिक धन दिया जाए लेकिन उनका मानना था कि इस पर विचार किया जाना चाहिए.

वहीं ब्रिटिश निषेचक समिति के डा. ऐलेन पासे का कहना है कि “महिला और पुरुष दाताओं को भुगतान की व्यवस्था असमान है.महिलाओं के लिए अंडाणुदान काफी असुविधाजनक है”.

लेकिन प्रोलाईफ पार्टी की राजनैतिक निदेशक जूलिया मिलिंग्टन का मानना है कि “मानव निषेचन और भ्रूणविज्ञान परिषद मुआवज़े के जिस प्रस्ताव पर विचार कर रही है वो दाताओं को होने वाली असुविधा के लिए ही तो है, और वह आम ख़र्चो की रक़म से कहीं अधिक भी है”.

उनका मानना है कि “अंडाणु और शुक्राणुदाताओं के लिए बदले में धन की व्यवस्था करना न केवल मानव निषेचन और भ्रूणविज्ञान परिषद के अधिकारक्षेत्र से बाहर है बल्कि यह क़ानून के भी ख़िलाफ है”.

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