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चूहे में विकसित हुए बंदर के शुक्राणु | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी वैज्ञानिकों ने चूहे के शरीर में बंदर के शुक्राणु विकसित करने में सफलता पाई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि उनका यह प्रयोग आगे चलकर एक दिन उन प्रजातियों को बचाने में मददगार साबित होगी जो विलुप्त हो रही हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस विधि से चूहों के भीतर मनुष्य के शुक्राणु भी तैयार किया जा सकता है. हालांकि वे मानते हैं कि यह एक विवादास्पद मामला होगा. वैज्ञानिकों ने यह कारनामा टिश्यू ट्रांसप्लांटेशन यानी उत्तकों के प्रत्यारोपण से तैयार किया है. पेनसिल्वानिया और कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की इस टीम ने 2002 में चूहे के शरीर में ही बकरी और सूअर के शुक्राणु विकसित करने में सफलता हासिल की थी. इस प्रयोग में बंदर के अंडकोष के उत्तक निकासकर उसे चूहे के भीतर रोपित कर दिया गया और इससे शुक्राणु पैदा कर लिया गया. आगे के प्रयोग अब वैज्ञानिक इसी तरह का प्रयोग बिल्लियों को लेकर भी करने वाले हैं.
उनका मानना है कि यह प्रयोग जानवरों की उन प्रजातियों को बचाने के लिए किया जा सकता है जो विलुप्त हो रही हो. तो क्या इसी आधार पर मनुष्यों के शुक्राणु भी विकसित किया जा सकते हैं? वैज्ञानिक मानते हैं कि सिद्धांत रुप से यह संभव है. वे कहते हैं कि किसी बच्चे के युवा होने के पहले उसके अंडकोष से उत्तक निकाल लिए जाएँ और उसे चूहे में रोपित कर दिया जाए तो शुक्राणु पैदा किया जा सकता है. उनका कहना है कि इस तरह कोई बच्चा युवा हुए बग़ैर ही पिता बन सकता है. |
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