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गुरुवार, 03 जुलाई, 2008 को 19:13 GMT तक के समाचार
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50 रुपए के लिए चलती ट्रेन से धकेला

घायल शंकर
शंकर की हालत अभी भी ख़तरे से बाहर नहीं है
पचास रुपए के नोट के विवाद में एक रेलवे अधिकारी ने 14 साल के एक बच्चे को चलती
ट्रेन से बाहर धकेल दिया जिससे उसे एक हाथ और पैर गँवाना पड़ा है.

इस बच्चे का कहना था कि नोट उसे डिब्बे की सफ़ाई के दौरान मिला है जबकि रेलवे के टिकट निरीक्षक का कहना था कि वह नोट उनका है और उसे लौटा दिया जाए.

यह घटना उड़ीसा की औद्योगिक नगरी राउरकेला में बुधवार की सुबह घटी.

शंकर नाम का यह बच्चा ट्रेन के डिब्बों की साफ़-सफ़ाई करके अपना गुज़ारा चलाता है.

बुधवार को वह राउरकेला में हावड़ा जाने वाली गीतांजलि एक्सप्रेस में चढ़ा था.

बताया जाता है कि शंकर को एक सीट के नीचे पचास रुपए का एक नोट मिला था. लेकिन टिकट निरीक्षक (टीटीई) का कहना था कि वह नोट उनका है और उन्होंने शंकर से कहा कि नोट उन्हें लौटा दे.

लेकिन जब शंकर ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो टीटीई ने शंकर की पिटाई की और फिर उसे चलती ट्रेन से धक्का दे दिया.

शंकर का मित्र राजेश इस घटना के समय वहाँ मौजूद था और उसने शोर मचाकर लोगों को इसकी सूचना दी.

लेकिन तब तक बगल की पटरी से गुज़रती ट्रेन से शंकर का एक हाथ और उसके एक पैर का हिस्सा कट चुका था और ख़ून बुरी तरह बह रहा था.

उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जहाँ डॉक्टरों का कहना है कि उसकी 'हालत स्थिर है लेकिन अभी भी ख़तरे से बाहर नहीं है'.

उसके पैर की कई नसें कट गई हैं जिसके कारण उसे ख़ून चढ़ाने में भी दिक़्कत हो रही है.

डॉक्टरों का कहना है कि वह सदमे में है और अभी ठीक तरह से बातचीत नहीं कर पा रहा है.

कार्रवाई का आश्वासन

इस घटना की ख़बर तेज़ी से फैली और सैकड़ों स्थानीय लोग राउरकेला स्टेशन पर एकत्रित हो गए.

 बच्चे की हालत स्थिर होने के बाद पाँचों टीटीई की एक पहचान परेड करवाई जाएगी
अर्जुन साहू, रेलवे पुलिस अधिकारी

लोगों ने दोषी अधिकारी के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की माँग को लेकर प्रदर्शन शुरु कर दिया और वे तभी शांत हुए जब आला अधिकारियों ने दोषी अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई का आश्वासन दिया.

इस बीच दक्षिण-पूर्वी रेलवे के ने गीतांजलि एक्सप्रेस में बुधवार को ड्यूटी कर रहे सभी पाँच टिकट निरीक्षकों को रेलवे पुलिस स्टेशन में हाज़िर होने का आदेश दिया है.

राउरकेला रेलवे पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी अर्जुन साहू ने बताया, "बच्चे की हालत स्थिर होने के बाद पाँचों टीटीई की एक पहचान परेड करवाई जाएगी."

शंकर उन सैकड़ों बच्चों में से है जो ट्रेन के यात्री डिब्बों की सफ़ाई करते हैं और बदले में यात्रियों से मिले पैसे से अपना पेट पालते हैं.

चूंकि वे बिना टिकट ट्रेन में सवार होते हैं, रेलवे के कर्मचारी अक्सर उनसे पैसे छीन लेते हैं.

दो महीने पहले ही राउरकेला स्टेशन पर एक रेलवे अधिकारी ने एक ग़रीब महिला को रेलवे के पुल से धक्का दे दिया था. महिला बच तो गई लेकिन उसे गंभीर चोटें आईं थीं.

बताया जाता है कि महिला अपने सर पर जलाऊ लकड़ी का गठ्ठर लेकर जा रही थी और अधिकारी कथित तौर पर उससे पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहा था.

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