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'भारत ग़रीबी दूर करने के रास्ते पर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि भारत में तेज़ी से ग़रीबी दूर हो रही है और वर्ष 2040 तक इसे पूरी तरह ख़त्म किया जा सकता है. चिदंबरम ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि अभी कुल आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा भारी ग़रीबी की चपेट में है. इसका मतलब है कि लगभग 25 करोड़ भारतीयों की आय रोज़ाना एक डॉलर से कम है. उन्होंने विश्वास जताया कि तेज़ आर्थिक विकास दर के बूते इस आँकड़े में भी गिरावट आएगी. वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि ऊँची विकास दर के साथ साथ बुनियादी संरचना को विकसित करना ज़रूरी है. पिछले हफ़्ते गोल्डमैन सैच ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत एक दशक के भीतर ब्रिटेन को पीछे छोड़ कर दुनिया की पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. इस वर्ष आर्थिक विकास दर नौ फ़ीसदी रही है और निर्यात भी लगभग 100 अरब डॉलर पर पहुँच गया है. हालाँकि बढ़ती मँहगाई सरकार के लिए चिंता का विषय है. तीन जनवरी को मँहगाई दर बढ़ कर छह फ़ीसदी से अधिक हो गई. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीयों की जीवनचर्या में रचा बसा है टाटा31 जनवरी, 2007 | कारोबार मँहगाई पर लगाम कसने की कोशिश31 जनवरी, 2007 | कारोबार अधिग्रहण का फ़ायदा होगा: रतन टाटा31 जनवरी, 2007 | कारोबार कोरस का सौदा टाटा के पक्ष में30 जनवरी, 2007 | कारोबार रिलायंस को विदेशी कंपनियों से डर नहीं29 जनवरी, 2007 | कारोबार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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