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नशे से निजात दिलाने की मुहिम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जब रहीम अहमदी पड़ोसी देश ईरान में अफ़ग़ान शरणार्थी था तब वह अपने दोस्तों के साथ अक्सर पिकनिक पर जाया करता था. इन पिकनिकों में वे भेड़ का गोश्त पकाते और हेरोइन और अफ़ीम के नशे में गोते लगाते थे. पहले-पहले तो 30 वर्षीय रहीम को यह सब बहुत मज़ेदार लगा लेकिन बाद में इसने उसकी जान ही ले ली. तालेबान सरकार के गिरने के बाद 2001 में जब वह लौटा तो अपने सामान के साथ नशे की आदत भी साथ लाया. काबुल के निजात ड्रग ट्रीटमेंट क्लीनिक में बैठे उसके पिता ने कहा, "मेरा परिवार मुझसे दूर हो गया था. तब मैंने जाना कि नशे की लत कितनी बुरी होती है." अफ़ग़ानिस्तान अफ़ीम और हेरोइन का सबसे बड़ा उत्पादक है लेकिन देश में नशे की समस्या के बारे में कभी नहीं पता लगा. नशे के आँकड़े संयुक्त राष्ट्र के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक 2005 में तीन करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश में दस लाख लोग अफ़ीम के नशे के आदी हैं. अधिकारियों और संगठनों का मानना है कि असली आँकड़े इससे कहीं ज़्यादा हो सकते हैं. देश के नशा निरोधक विभाग के मंत्री जनरल खुदादाद कहते हैं, "नशेड़ियों की संख्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है. यह एक तरह का युद्ध है जिसे हम लड़ रहे हैं." अफ़ग़ानिस्तान में नशे की आदत ने कई रूप ले लिए हैं.
अहमदी की तरह ऐसे कई शरणार्थी नशे की लत के साथ वापस आए हैं. दूसरे अफ़ीम के किसान भी हैं जो अपनी उगाई अफ़ीम के ही शिकार हो गए. कुछ महिलाएँ भी हैं जो गलीचा बनाती हैं और अपनी उंगलियों के दर्द को दूर करने के लिए अफ़ीम लेने लगीं. इसके अलावा और भी बहुत से लोग हैं जो किसी न किसी वजह से नशा करने लगे. अधिकारियों ने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद से देश भर में 40 नशा छु़ड़ाने के केंद्र स्थापित किए हैं. ज़्यादा केंद्रों की ज़रूरत निजात क्लीनिक के निदेशक डॉ तारिक सुलेमान का कहना है कि इलाज के लिए केंद्रों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की ज़रूरत है.
उन्होंने यह भी कहा कि इससे भी ज़्यादा ज़रूरत लोगों को नशे के प्रति जागरूक करने की है. उन्होंने कहा, "महत्वपूर्ण बात यह है कि वे युवा जो नशे के आदी नहीं हैं, इसके ख़तरों के बारे में जानें और यह बहुत सकारात्मक कदम होगा." निजात क्लीनिक नशे की आदत को छुड़ाने के लिए तीन महीनों का कार्यक्रम चलाता है. नशे के आदी लोगों को डॉक्टर यह सलाह देते हैं कि वे कैसे सुधरें और उनके शरीर को नशामुक्त कैसे किया जाए. सफलता का अनुपात इस कार्यक्रम का एक सामाजिक पहलू यह भी है. यहाँ रह रहे लोग रोज़ाना एक साथ बैठकर चाय पीते हैं, शतरंज खेलते हैं और बातचीत करते हैं. डॉ सुलेमान कहते हैं कि इसके इलाज में सफलता का 33 फ़ीसदी का अनुपात है. पहले गाड़ी चलाने वाला नजीब हाकिमी इस कार्यक्रम में दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ हेरोइन की आदत से बाहर निकलने में कामयाब हुआ. उसे यह आदत अपने भतीजे से लगी जो हेरोइन का आदी था. वह कहता है, "मेरे पास आज जो है वह है मेरा परिवार लेकिन मेरा भाग्य अच्छा है कि मैं ज़िंदा हूँ." वह बताता है कि कैसे नशे की आदत की वजह से उसकी नौकरी चली गई. निजात क्लीनिक में दिन भर ऐसे लोगों का तांता लगा रहता है जो नशा छुड़ाने के लिए मदद चाहते हैं. |
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