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गूजरों की सरकार से वार्ता की संभावना कम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले तीन दिनों से जारी गूजर आंदोलन और इस दौरान हुई हिंसा से चिंतित राजस्थान सरकार ने आंदोलनकारियों के सामने जो बातचीत का प्रस्ताव रखा है, उसमें गूजरों के शामिल होने की संभावना कम ही दिख रही है. हालांकि इस बारे में गूजर नेता बेंसला की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है और न ही कोई प्रतिक्रिया मिली है पर सूत्रों से मिल रही जानकारी बातचीत की संभावना को कमतर बताती है. स्थानीय सूत्र बता रहे हैं कि गूजर पिछले दो दिनों में हुई हिंसा से बहुत नाराज़ हैं और बातचीत के बजाय आंदोलन जारी रखने के मन में हैं. शुक्रवार को राजस्थान में शुरू हुए गूजर आंदोलन में हुई हिंसा के दौरान अभी तक 35 लोगों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है. शुक्रवार को हिंसा में 16 लोग मारे गए थे. शनिवार की हिंसा में अबतक मृतकों की तादाद 19 हो चुकी है. मरनेवालों में अधिकतर लोग पुलिस फ़ायरिंग के शिकार हुए हैं. इस दौरान कई लोगों के घायल होने की भी ख़बर है. इस बीच गूजर बिरादरी के प्रदर्शनकारी अभी भी सिकंदरा और बयाना में मृतकों के शवों के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने मृतकों का अंतिम संस्कार नहीं किया है. गूजर समुदाय के लोग अपनी बिरादरी को जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. बयाना, करोली, भरतपुर ज़िले इस आंदोलन से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं. राज्य सरकार ने दो दिन लगातार हुई गोलीबारी के बाद करोली और भरतपुर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को हटा दिया है. बातचीत का विकल्प राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने शनिवार को देर शाम बताया था कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गूजरों के नेता किरोड़ी सिंह बैंसला को रविवार की सुबह वार्ता के लिए बुलवाया है.
पर गूजरों की ओर से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई और उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखा है. जानकार बताते हैं कि गूजर नेताओं के पास भी आंदोलनकारी लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर चलना ज़्यादा महत्वपूर्ण है और ऐसे में राज्य सरकार से बातचीत की संभावना फिलहाल कम दिखती है. एक साल के भीतर ही दूसरी बार आंदोलन के दौरान गूजरों के मारे जाने से बिरादरी में भारी असंतोष व्याप्त है और इसीलिए बिरादरी के नेतृत्व के लिए समझौते की ओर बढ़ना आसान नहीं होगा. गूजरों के आंदोलन का ज़्यादा प्रभाव पूर्वी राजस्थान में है. आरक्षण की माँग पर गूजरों ने पिछले साल यानी वर्ष 2007 में उग्र आंदोलन किया था. तब 29 मई से चार जून के बीच कई बार आंदोलन ने हिंसक रूप लिया और कुल 26 लोग मारे गए थे. राज्य सरकार और गूजर प्रतिनिधियों के बीच समझौते के तहत आरक्षण की माँग पर विचार के लिए चोपड़ा आयोग का गठन भी किया गया था. इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट भी पेश की थी लेकिन इसमें आरक्षण के बारे में स्पष्ट तौर पर कोई सुझाव नहीं दिया गया था. अब गूजरों का कहना है कि उन्हें चोपड़ा आयोग से कोई मतलब नहीं है और वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया अपने वादे के मुताबिक कार्यकाल ख़त्म होने से पहले आरक्षण देने की सिफ़ारिश केंद्र सरकार से करें. |
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