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'भारत-पाक शांति प्रक्रिया जारी रहेगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं और निकट भविष्य में शांति बातचीत का पाँचवाँ दौर आयोजित किया जाएगा. दोनों देशों के बीच इस्लामाबाद में दो दिन तक चौथे दौर की बातचीत हुई है जिसके बाद यह घोषणा की गई. पाकिस्तान में फ़रवरी 2008 में हुए चुनाव और नई सरकार के गठन के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली उच्चस्तरीय बातचीत थी. भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने इस्लामाबाद में बुधवार को मुलाक़ात की है और शांति प्रक्रिया की समीक्षा भी की. चार साल से चल रही इस शांति वार्ता के दौरान कश्मीर मुद्दे पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है. दोनों ही पक्षों ने शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है यानी दोनों देशों के बीच बातचीत का पाँचवाँ दौर जल्दी ही किया जाएगा. भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से मुलाक़ात की थी और उसके बाद विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी से बातचीत की. भारतीय विदेश मंत्रालय के एक वक्तव्य में कहा गया है, "हम इस बातचीत में आपसी सहयोग, विश्वास और यथार्थ परिस्थितियों के माहौल में कर रहे हैं." पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि वह जून 2008 में भारत की यात्रा करेंगे और इस यात्रा में जुलाई 2008 के मध्य में पाँवचाँ दौर आयोजित करने का रास्ता साफ़ किया जाएगा. दोनों ही देशों ने कहा है कि चौथे दौर में ठोस प्रगति हुई है और अपने यहाँ दूसरे देश के क़ैदियों तक दूतावास के अधिकारियों की पहुँच संभव बनाने के लिए एक समझौता भी किया गया है. कुरैशी ने कहा कि इस समझौते के तहत एक दूसरे के क़ैदियों की शिनाख़्त और उनकी जल्दी रिहाई के लिए रास्ता निकाला जा सकेगा. दोनों देशों के सैकड़ों लोग एक दूसरे के यहाँ जेलों में बंद हैं. भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इस्लामाबाद में बुधवार को संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा, "हमने अपनी बातचीत में काफ़ी प्रगति की है और आशा करते हैं प्रगति की यही रफ़्तार पाँचवें दौर में भी जारी रहेगी जो जुलाई में होने की संभावना है. कश्मीर मुद्दे पर भी बातचीत रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है." सिलसिला जारी संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान की नई सरकार उन कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार नज़र आती है जो राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने शुरू किए थे लेकिन गठबंधन में मतभेदों की वजह से राजनीतिक अस्थिरता का ख़तरा भी मंडरा रहा है.
भारत और पाकिस्तान ने मौजूदा शांति प्रक्रिया वर्ष 2004 में शुरू की थी ताकि पिछले क़रीब छह दशक से चली आ रही अदावत को समाप्त करके दोस्ताना माहौल बनाया जा सके. इस शांति प्रक्रिया के तहत दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ाने वाले अनेक उपाय किए गए हैं जिनमें हवाई संपर्क बहाल करना और बस सेवा शुरू करना भी शामिल है. दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और खेलों का भी आदान-प्रदान हुआ है और परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में भी सुरक्षा उपाय करने पर सहमति हुई है. लेकिन कश्मीर मुद्दे पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. भारत प्रशासित कश्मीर में 1989 से चरमपंथी गतिविधियों जारी हैं. भारत का आरोप है कि पाकिस्तान वहाँ विद्रोही गतिविधियों को समर्थन देता है जबकि पाकिस्तान इन आरोपों का खंडन करता है. |
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