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मुंबई में 'बॉम्बे' पर हंगामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में अब बॉम्बे कहना भी आपको मंहगा पड़ सकता है क्योंकि शिवसेना नहीं चाहती कि मुंबई में कुछ भी बॉम्बे के नाम से जाना जाए. बंबई का नाम बदल कर मुंबई करवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाली इस पार्टी ने अब स्कूलों और दुकानों को भी निशाने पर लिया है और तोड़-फोड़ की है. नब्बे के दशक में बंबई के नाम को लेकर आंदोलन करने वाली शिवसेना ने अब स्कूलों और शो-रूम को निशाना बनाना शुरू किया है. पार्टी चाहती है कि जिन स्कूलों या संस्थानों के नाम में बॉम्बे या बंबई हो, उन्हें भी बदल कर मुंबई कर दिया जाए. पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुंबई के प्रतिष्ठित बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल पर धावा बोल कर साइन बोर्ड उखाड़ दिए और उसकी जगह मुंबई लिख दिया. इतना ही नहीं वर्ली में बॉम्बे डाइंग के शो-रूम पर भी कार्यकर्ता पहुँचे और बॉम्बे शब्द को हटा दिया. इन दोनों ही स्थानों पर तोड़-फोड़ की गई. लेख इससे पहले शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में इस संबंध में एक लेख छपा था कि मुंबई में कई संस्थान अभी भी बॉम्बे या बंबई के नाम से चल रहे हैं और ये ग़लत है.
मैंने सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत से बात की और पूछा कि संस्थानों के साथ ऐसा करना कितना सही है. वो कहते हैं, "देखिए अब सरकारी तौर पर भी बंबई का नाम मुंबई हो गया है लेकिन कुछ संस्थान ऐसे हैं जिन्होंने अपना नाम नहीं बदला, मसलन बॉम्बे स्कॉटिश, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, बॉम्बे डाइंग. इनको बदलना चाहिए. हमने अभी बॉम्बे स्कॉटिश और बॉम्बे डाइंग के शो-रूम में जाकर नाम हटा दिया है. कालिख पोत दी है और चेतावनी दी है कि आठ दिन में बदल दें अपना नाम." पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र और ख़ासकर मुंबई में शिवसेना से अलग होकर बनी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने उत्तर भारतीयों को निशाना बनाया है. कहा जा रहा है कि उत्तर भारतीयों के प्रति कड़े रवैये से राज ठाकरे की लोकप्रियता बढ़ी है. तो क्या यही कारण है कि शिवसेना ने एक बार फिर तोड़-फोड़ की राजनीति का रुख़ किया है. असुरक्षा स्थानीय पत्रकार समर खड़स कहते हैं, "असुरक्षा की भावना तो है ही क्योंकि दोनों ही दल शिवसेना और राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस एक ही तरह की विचारधारा वाले दल हैं."
शिवसेना के एक वर्ग को लगता है कि राज ठाकरे उनसे मराठी वोट छीन रहे हैं. समर कहते हैं कि बॉम्बे डाइंग और बॉम्बे स्कॉटिश की घटना के पीछे संजय राउत हैं और उनके नेतृत्व वाला वर्ग तोड़-फोड़ की राजनीति आगे बढ़ाना चाहता है. बॉम्बे स्कॉटिश में ही राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बच्चों ने शिक्षा ली है. वैसे महाराष्ट्र में या मुंबई में मुद्दों की कमी नहीं हैं. किसानों की आत्महत्या हो या फिर मुंबई में आधारभूत ढाँचे की कमी, तो फिर नाम इतना बड़ा मुद्दा क्यों. समर खडस इसे राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ते हैं और कहते हैं कि जब पिछले 15 साल की राजनीति बाबरी के मस्जिद के इर्द-गिर्द घूमती है तो फिर महाराष्ट्र में ऐसे बेमानी सवाल उठाया जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं. जात-पात, धर्म और भाषा की राजनीति का फल हम देख चुके हैं लेकिन अब देखना है कि एक नाम के नाम पर राजनीति क्या रंग लाती है. | इससे जुड़ी ख़बरें मुंबई का विकास नहीं हुआ: मनोहर जोशी19 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस लालू ने ठाकरे के बयान की निंदा की01 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस विवादास्पद बयान के बाद हिंसा03 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस उत्तर भारतीयों पर फिर भड़के राज ठाकरे09 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस उद्धव ठाकरे भी ग़ैर मराठियों पर गरजे10 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस राज ठाकरे की बातों से सुप्रीम कोर्ट नाराज़22 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस राज ठाकरे को मुंबई पुलिस का नोटिस09 मई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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