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मुंबई का विकास नहीं हुआ: मनोहर जोशी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर मध्य मुंबई से शिवसेना प्रत्याशी और निवर्तमान लोकसभा में अध्यक्ष रहे मनोहर जोशी मानते हैं कि बीते वर्षों में मुंबई का विकास नहीं हो सका है. वैसे वह इसकी ज़िम्मेदारी राज्य सरकार पर अधिक डालते हैं. इस बारे में उल्लेखनीय ये है कि मुंबई की छह लोकसभा सीटों में से पाँच शिवसेना-भाजपा गठबंधन के खाते में रहीं हैं और यह गठबंधन केंद्र की सत्ता में भी था. जोशी विकास के मुद्दों के बारे में कहते हैं कि जो काम सांसद का नहीं है उसके लिए सांसद को पकड़ना ठीक नहीं है. उनके अनुसार, “अनेक काम ऐसे हैं जिन्हें पूरा करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है.” इलाक़े में विकास की कोशिशों के बारे में वह कहते हैं, “मैंने पूरी कोशिश की है.” ‘धारावी’ एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-झोपड़ी बस्ती है और वह मनोहर जोशी के ही इलाक़े में आती है. हालाँकि वहाँ अब भी कई समस्याएँ हैं मगर जोशी के अनुसार उन्होंने धारावी के विकास के लिए केंद्र सरकार से 500 करोड़ रुपए का पैकेज जारी करवाया. वह कहते हैं, “मैं 500 करोड़ रुपए लाया पर विकास का काम आगे बढ़ाना राज्य सरकार का काम है.” नज़रिए का फ़र्क़ है मनोहर जोशी इस सीट पर पिछली बार हुए चुनाव में पचास फ़ीसदी से भी ज़्यादा मत पाकर जीते थे और उनकी जीत के अंतर के साथ ही मनोहर जोशी के राजनीतिक क़द को देखते हुए ये माना जा रहा है कि इस बार भी ये सीट जोशी के ख़ाते में जा सकती है.
देश में आर्थिक विकास के नारे के बारे में मनोहर जोशी कहते हैं कि हमारा विदेशी मुद्रा भंडार जितना है उतना पहले कभी नहीं था. उनके अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार भरे रहने से विदेशों में देश की साख बढ़ती है उससे पैसे आते हैं और विकास के काम में तेज़ी आती है. फ़ील गुड के बारे में मनोहर जोशी का कहना है कि ये तो देखने वाले के ऊपर निर्भर है. अगर व्यक्ति की सोच सकारात्मक होगी तो उसे अच्छी चीज़ें भी दिखेंगी वरना उसे सब अंधकारमय ही दिखाई देगा. वैसे वह मानते हैं कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है. उनके अनुसार, “ये तो मानना ही होगा कि कांग्रेस सरकार पिछले 45-50 साल में जो नहीं कर पाई वो इस सरकार ने किया.” जोशी मानते हैं कि सरकार पहली बार आई थी इसलिए उसमें काम करने का जोश था और उसने काम किया भी. मनोहर जोशी से पहले ये सीट रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के रामदास अठावले के पास थी. |
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