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मैं सिर्फ़ शांति का उपासक नहीं हूँ: निरुपम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर पश्चिम मुंबई सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सुनील दत्त के विपक्ष में खड़े शिवसेना प्रत्याशी संजय निरुपम का कहना है कि वह सिर्फ़ शांति के उपासक नहीं हैं बल्कि आम लोगों के बीच जाकर काम करते हैं. निरुपम कहते हैं कि सुनील दत्त का एक करिश्मा था जो कि अब ख़त्म हो गया है और लोगों में उनसे नाराज़ग़ी है. शिवसेना प्रत्याशी के अनुसार, “मैं तो उनके सामने ज़ीरो हूँ.मैं बड़ी-बड़ी बातें नहीं करता. मैं शांति का उपासक नहीं हूँ, शांति यात्राएँ नहीं करता लेकिन मैं आम लोगों के बीच ख़ूब काम करता हूँ.” ये पूछे जाने पर कि सुनील दत्त इस सीट से कभी नहीं हारे तो उन्हें अपनी जीत का भरोसा कैसे है निरुपम का कहना है, “हर व्यक्ति कभी न कभी हारता है. लोगों में सुनील दत्त को लेकर जो नाराज़गी है उसे मैं अगर वोटों में बदल पाया तो मैं जीत रहा हूँ.” मुंबई में उत्तर भारतीयों के साथ हुए दुर्व्यवहार के मसले पर निरुपम मानते हैं कि दुर्व्यवहार हुआ मगर वह विश्वास भी दिलाते हैं कि अगर वह जीते तो इसका मतलब उत्तर भारतीयों की ताक़त बढ़ना ही होगा. जीत की जी-तोड़ कोशिश वह जीत के लिए कोई मौक़ा छोड़ना नहीं चाहते और इसीलिए वह हर वर्ग के लोगों से मिल रहे हैं. उनसे मेरी मुलाक़ात काफ़ी जद्दोजहद के बाद हुई बांद्रा में समंदर के किनारे बने कैफ़े में जहाँ वह कॉलेज के कुछ लड़कों से मिलकर उनकी शंका का समाधान करने की कोशिश कर रहे थे. मगर बातचीत वहाँ भी नहीं हो सकी और मैंने रास्ते में गाड़ी में उनसे बातचीत की.
निरुपम लोगों के पास विकास का मुद्दा लेकर जा रहे हैं और उनका कहना है कि उनके क्षेत्र के 60 फ़ीसदी लोग झोपड़ पट्टियों में रहते हैं मगर वहाँ पर नागरिक सुविधाओं की ज़बरदस्त कमी है. निरुपम दावा करते हैं कि वह ऐसे सभी मसलों पर ख़ास ध्यान देंगे. शिवसेना प्रत्याशी ने कहा, “दत्त साहब ने पाँच साल में कुछ भी नहीं किया. देश-दुनिया में शांति हो ये आदर्श व्यवस्था है मगर जिसकी रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी न हों वो पूछता है कि मैंने आपको चुनकर भेजा आपने मेरे लिए क्या किया?” फ़ील गुड के बारे में विपक्ष के आरोपों पर निरुपम कहते हैं कि निश्चित रूप से झोपड़पट्टियों में फ़ील गुड नहीं है मगर फ़ील गुड की असली बात ये है कि देश में कुछ अच्छा हो रहा है. उनका कहना है कि अब कम से कम देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर तो आ ही गई है. वह कहते हैं, “ख़ुशहाली का रास्ता तैयार हो चुका है और हम उसी पर आगे बढ़ रहे हैं.” |
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