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तिवारी बेहतर विकल्प थे:रिज़वी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अम्मार रिज़वी ने कहा है कि अगर उत्तरांचल के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मुक़ाबले विकल्प के तौर पर आगे करके चुनाव लड़ा जाता तो ज़्यादा अच्छा रहता. अम्मार रिज़वी ने बीबीसी के साथ एक विशेष बातचीत में खेद प्रकट किया कि समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को 'योजनाबद्ध तरीक़े से' किनारे करके पार्टी के दुश्मनों और दलबदलुओं को महत्वपूर्ण पदों पर बिठाया जा रहा है. डॉक्टर रिज़वी ने कहा कि उन्होंने इस सिलसिले में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को दर्जनों ख़त लिखे हैं. दरअसल डॉक्टर रिज़वी ने अपनी नाराज़गी प्रकट करने के लिए पूर्व क़ानून मंत्री राम जेठमलानी की उम्मीदवारी को मुद्दा बनाया था. एक बयान में उन्होंने कांग्रेस के उन नेताओं को आड़े हाथों लिया जो राम जेठमलानी को समर्थन देने की वकालत कर रहे थे. उन्होंने याद दिलाया कि जेठमलानी ने किस तरह इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का विरोध किया था. इसी बयान में उन्होंने खेद प्रकट किया कि हाल ही में उत्तर प्रदेश कांग्रेस का जो पुनर्गठन हुआ उसमें सभी प्रमुख लोग दूसरे दलों से आए हैं.
उदाहरण के लिए उत्तरांचल मामलों के प्रभारी चौधरी वीरेंद्र सिंह, कार्यवाहक अध्यक्ष राज बहादुर और चुनाव अभियान समिति के संयोजक डॉक्टर संजय सिंह. इस बयान पर डॉक्टर रिज़वी को कुरेदने पर उनका दर्द फूट पड़ा. उन्होंने कहा, "वास्तव में योजनाबद्ध तरीक़े से निष्ठावान कार्यकर्ताओं को हटाया जा रहा है." लेकिन डॉक्टर रिज़वी ने इसके लिए सोनिया गांधी के बजाय उनके सलाहकारों को दोष दिया. उन्होंने नारायण दत्त तिवारी के बारे में कहा,"उन्हें तो वास्तव में कोल्ड स्टोरेज में डाल दिया गया है. जैसे किसी समुंदर में तैरनेवाले को स्वीमिंग पूल में डाल दिया जाए वही हाल नारायण दत्त तिवारी का हो गया है." डॉक्टर रिज़वी के अनुसार जब तक नारायण दत्त तिवारी दिल्ली में थे तब तक वे पार्टी के लिए बेहद फ़ायदेमंद साबित हो रहे थे. उन्होंने इससे सहमति जताई कि अटल बिहारी वाजपेयी के मुक़ाबले नारायण दत्त तिवारी बेहतर उम्मीदवार साबित हो सकते थे. उन्होंने कहा, "नारायण दत्त तिवारी वाजपेयी जी के सामने एक मज़बूत प्रतिद्वंद्वी की शक्ल में सामने आते क्योंकि दोनों क़रीब-क़रीब एक ही वर्ग से ताल्लुक़ रखते हैं, एक जाति के हैं और दोनों का राजनीतिक अनुभव क़रीब-क़रीब बराबर है. बल्कि बहुत सी चीज़ों में नारायण दत्त तिवारी जी का अनुभव ज़्यादा है." उन्होंन कांग्रेस से बाहर निकलने की भूमिका बनाने से इनकार किया. उन्होंने कहा, "फ़िलहाल तो पार्टी के अंदर रहकर ही संघर्ष करना है." दरअसल जितने जनमत सर्वेक्षण आ रहे हैं उनमें कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर वाजपेयी सोनिया गांधी से कहीं आगे हैं. माना जा रहा है कि इटली में पैदाइश और प्रशासनिक अनुभव का नहीं होना सोनिया गांधी के लिए एक बड़ा नकारात्मक पहलू है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी का एक गुट मानता है कि अगर सोनिया गांधी के बजाय पार्टी वाजपेयी जी के मुक़ाबले नारायण दत्त तिवारी जैसे अनुभवी नेता को सामने रखती है तो चुनाव में दल की स्थिति बेहतर होती है. डॉक्टर रिज़वी ने अनेक कांग्रेसी नेताओं की इसी भावना को मुखर किया है. |
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