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रविवार, 18 अप्रैल, 2004 को 13:50 GMT तक के समाचार
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कहाँ है फील गुड : सुनील दत्त

सुनील दत्त
सुनील दत्त ने कहा कि देश में घूमने पर अंदाज़ा हो जाता है कि 'फ़ीलगुड' कहाँ है
उत्तर पश्चिम मुंबई लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी सुनील दत्त को उम्मीद है कि यदि राजनीति में इसी तरह का ध्रुवीकरण रहा तो देश में दो दलीय प्रणाली आ जाएगी.

धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के एकजुट होने से काफ़ी ख़ुश दिख रहे सुनील दत्त के अनुसार छोटे दल तभी बनते हैं जब उनकी सुनवाई नहीं होती.

इस पर जब उनसे पूछा गया कि क्या वो छोटे दलों के हक़ में नहीं हैं तो उनका कहना था कि जब छोटे दलों की सारी माँगें पूरी हो जाएँगी और उन्हें लगेगा कि उनकी सुनवाई हो सकती है तो फिर वे छोटे दल ख़ुद-ब-ख़ुद बड़े दलों में मिल जाएँगे.

राहुल गाँधी के राजनीति में आने से कांग्रेस पर लग रहे वंशवाद के आरोपों के बारे में सुनील दत्त का कहना था, “अगर एक वंश अच्छा काम करता है तो ये मतलब नहीं है कि उसे दरिया में डाल दें.”

राहुल के राजनीति के अनुभव पर भी सुनील दत्त ने उन्हें बचाने की कोशिश करते हुए कहा कि जिस आदमी के घर में खाने की मेज़ से लेकर हर समय तक राजनीति तक की ही बातें होती हों, उसकी राजनीति की समझ पर कैसे सवाल उठाया जा सकता है.

जीत के विश्वास से भरे दिख रहे सुनील दत्त ने गठबंधन की कोशिशों के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी की काफ़ी तारीफ़ की.

कहाँ है फ़ील गुड?

‘फ़ील गुड’ के बारे में सुनील दत्त का कहना था कि जिस देश में किसानों को आत्महत्या करनी पड़ रही हो वहाँ कैसा फ़ील गुड?

 अगर एक वंश अच्छा काम करता है तो ये मतलब नहीं है कि उसे दरिया में डाल दें
सुनील दत्त

उनका कहना है कि उस पैसे का क्या फ़ायदा जो बैंक में ही पड़ा रहे.

केंद्र सरकार के ‘फ़ील गुड’ और ‘शाइनिंग इंडिया’ के बारे में दत्त कहते हैं, “आज रिज़र्व बैंक में जो पैसा पड़ा है वो महज़ काग़ज़ के टुकड़े ही हैं. ज़रूरी ये देखना है कि हमने जनता को इन अरबों डॉलर का क्या लाभ दिया.”

सुनील दत्त ने इस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने ग़रीबों के लिए कुछ ख़ास नहीं किया और न ही बेरोज़ग़ारी जैसे मसले पर पैसा ख़र्च किया.

उनका कहना है कि इस सब का फ़ायदा कुछ ख़ास लोगों को ही हो रहा है जबकि अधिकतर लोगों की समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं.

दत्त को इस क्षेत्र की जनता एक समाज सेवक और शांति के पुजारी के रूप में भी देखती है. आम लोगों से बात करने पर पता चलता है कि किस तरह कमज़ोर वर्ग और ग़रीब तबके के लोग उन्हें पसंद करते हैं.

सुनील दत्त ‘सदभावना के सिपाही’ नाम का एक संगठन भी चलाते हैं और वह विभिन्न यात्राओं के ज़रिए लोगों में शांति का संदेश देते रहे हैं.

भारत-पाकिस्तान संबंध

भारत और पाकिस्तान के संबंध सुधारने की कोशिशों के बारे में सुनील दत्त कहते हैं कि अगर संबंध सुधारने की कोशिशों में गंभीरता होगी तो निश्चित ही प्रयास सफल होंगे.

 हमारी मासूम जनता इनकी बातों में आ जाती है. पूरे देश में घूमिए तो 'फ़ील गुड' का अंदाज़ा हो जाएगा
सुनील दत्त

उनका कहना था, “अगर ये कोशिशें सिर्फ़ मुसलमान भाइयों का वोट पाने के लिए की जा रही होंगी तो ये सफल नहीं होगी और फिर सफलता के लिए दोनों ओर से गंभीर कोशिशें होनी ज़रूरी हैं.”

सुनील दत्त ने किसी की भी व्यक्तिगत आलोचना से परहेज़ बरता और कहा कि वह इस तरह की राजनीति में भरोसा नहीं रखते.

दत्त अभी राजनीति से संन्यास लेने का इरादा नहीं रखते क्योंकि उनके हिसाब से राजनीति ही ऐसी जगह है जहाँ से वह अपने मन की बात कह सकते हैं.

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