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यशवंत सिन्हा के सामने कड़ी चुनौती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हजारीबाग में पिछले दो चुनावों में जीत दर्ज कर चुके भारतीय जनता पार्टी के पूर्व वित्त मंत्री और अब विदेश मंत्रालय संभाल रहे यशवंत सिन्हा क्या इस बार भी पहले जैसी भारी जीत हासिल कर पाएँगे. ये सवाल इस समय इसलिए उठ रहा है क्योंकि झारखंड में इस बार सभी 6 प्रमुख विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और वाम दल एक साथ हैं. विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड में पिछले चुनाव में भाजपा की सफलता के पीछे मुख्य कारण विपक्षी वोटों का विभाजन था. यशवंत सिन्हा का मानना है कि हजारीबाग से जीत उनकी होगी, क्योंकि यहाँ जितना विकास का काम उन्होंने कराया किसी और ने नहीं. मैंने पाँच वर्षों में हजारीबाग में जितना काम किया है उतना 50 वर्षों में नहीं हुआ. वादे-दावे “यहाँ की जो पुरानी माँगे थीं वो सारी मैंने पूरी की हैं और निश्चित रूप से 50 साल से लटके पड़े कामों को कोई पाँच सालों में पूरा नहीं कर सकता. यहाँ की जनता ये जानती है.” पर उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के भुवनेश्वर प्रसाद मेहता का कहना है कि तीन साल पहले गठित इस राज्य में कोई विकास नहीं हुआ. वे कहते हैं, ‘‘यशवंत सिन्हा ने कुछ किया है नहीं, अब विकास के नाम पर वोट माँग रहे हैं, ये तो वित्त मंत्री थे, गाँव का विकास नहीं हुआ, एक जगह रोड नहीं बनी, महँगाई के कारण त्रस्त हैं, जब से यशवंत सिन्हा सांसद बने हैं यहाँ 132 कारखाने बंद हुए हैं.’’ यशवंत सिन्हा का सिरदर्द बढ़ाने के लिए यहाँ भाजपा के निष्कासित कर दिए गए विश्वकर्मा भी हैं, जो एक निर्दलीय उम्मीदवार हैं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के भुवनेश्वर महतो को पूरा यकीन है कि सिन्हा को सत्ताधारी दल से होने वाली नाराज़गी का सामना करना पड़ेगा. मुसलमान वहीं बीजेपी खेमे में इस बात की खुशी है कि यहाँ का करीब 2.5 लाख मुस्लिम मतदाता उसकी ओर बढ़ रहा है. यशवंत सिन्हा कहते हैं कि ‘‘इस चुनाव में उनका जबरदस्त झुकाव है, भाजपा की तरफ, मेरी तरफ. और मैं समझता हूँ कि इस बार के चुनाव में मुझे बहुत बड़ी मात्रा में मुस्लिम मत मिलने वाले हैं.” वे कहते हैं, “मुसलमान अंततः इस बात को महसूस कर रहे हैं कि बाकी पार्टियों ने उनके साथ छलावा किया है.’’ यहाँ के कुछ मुसलमानों का कहना था कि विकास और सिन्हा के व्यक्तित्व के कारण वे भाजपा के लिए वोट डालना चाहते हैं. वोट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि चुनाव के दिन तक मुस्लिम मतदाता अपना मन बदल देंगे. फिलहाल कोयला खदानों वाले इस क्षेत्र में विकास मुद्दा बना हुआ है. स्थानीय राजनीति पर नज़र रखने वाले कहते हैं कि विपक्षी एकता से बदले जातिगत समीकरणों की तोड़ निकालना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी. |
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