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महिला प्रदर्शनकारियों पर गिरी गाज | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाली पुलिस ने चीन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही 500 से ज़्यादा तिब्बती महिलाओं को गिरफ़्तार किया है. ये महिलाएँ तिब्बत में चीन की कार्रवाई का विरोध कर रही थी. राजधानी काठमांडू में हुआ यह विरोध प्रदर्शन ख़ास इसलिए था क्योंकि इसमें सिर्फ़ महिलाएँ ही शामिल हुई. मार्च से शुरू हुए चीन विरोधी प्रदर्शनों में यह सबसे बड़ा था. प्रदर्शनकारी महिलाओं ने काली पट्टी बाँध रखी थी और तिब्बत को आज़ादी के पक्ष में नारे लगा रही थी. पुलिस ने क़रीब 560 महिला प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन महिला प्रदर्शनकारियों को राजधानी काठमांडू में अलग-अलग जगह हिरासत में रखा गया है और उन्हें बाद में छोड़ दिया जाएगा. प्रदर्शन मार्च में तिब्बत की राजधानी ल्हासा में हुई हिंसा और फिर चीन की कार्रवाई के बाद राजधानी काठमांडू में क़रीब-क़रीब नियमित रूप से प्रदर्शन होते रहते हैं. नेपाल में 20 हज़ार से ज़्यादा तिब्बती शरणार्थी रहते हैं. नेपाल सरकार का कहना है कि वह चीन के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दे सकती क्योंकि वह तिब्बत को चीन का अभिन्न अंग मानती है. हालाँकि संयुक्त राष्ट्र नेपाल में तिब्बती प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की आलोचना कर चुका है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह सामाजिक भावना के ख़िलाफ़ है. पहले भी नेपाल में कई बार विरोध प्रदर्शन हुए हैं और हर बार नेपाल की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सख़्ती दिखाई है. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन की नीतियाँ हैं दोषी: तिब्बती प्रतिनिधि08 मई, 2008 | भारत और पड़ोस गंभीर चर्चा का स्वागत है: दलाई लामा26 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस ओलंपिक रिले बिना बाधा के संपन्न17 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस ओलंपिक मशाल विरोधियों को चेतावनी20 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस 'राजनीति से अलग रहे खेल की मशाल'10 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस तिब्बत पर बीजिंग ने फिर बजाई घंटी03 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस एमनेस्टी ने चीन की कड़ी आलोचना की02 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल में सैंकड़ों तिब्बती गिरफ़्तार30 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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