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तिब्बत पर बीजिंग ने फिर बजाई घंटी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने चीन को आश्वस्त किया है कि उसकी धरती से तिब्बती कार्यकर्ताओं को चीन विरोधी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी. तिब्बत के मामले पर एक सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी बार है जबकि चीन ने भारत सरकार को अपनी चिंता से अवगत कराया है. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ने ख़बर दी है कि चीनी विदेश मंत्री यांग जेईची ने भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी से टेलीफ़ोन पर बात की और उन्हें "तिब्बत के मामले में चीन के रुख़ से अवगत कराया." भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी करके इस टेलीफ़ोन संवाद की जानकारी दी है. बयान में कहा गया कि भारत तिब्बतियों को चीन विरोधी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं देता है. समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया, "प्रणव मुखर्जी ने कहा कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र चीन का हिस्सा है और भारत की धरती से चीन विरोधी तिब्बती राजनीतिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा." समाचार एजेंसी के मुताबिक़, बुधवार को यांग ने प्रणव मुखर्जी से ये भी कहा कि यह साबित हो गया है कि चीन को विभाजित करने की 'तिब्बती धर्मगुरू की यह चाल' और आने वाली सारे चालें नाकाम ही रहेंगी. इससे पहले 30 मार्च को चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायण से फ़ोन पर बातचीत की थी और उन्हें तिब्बत में हुए 'ख़ूनी अपराधों' के बारे में बताया था और तिब्बत मामले पर अपने विचार प्रकट किए थे. कई जगहों पर तिब्बतियों के विरोध प्रदर्शन के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने 30 मार्च को बीजिंग स्थित भारतीय राजदूत को रात के दो बजे तलब किया था. भारत में तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला में रहते हैं और उनके अनुनायी भी भारत में बड़ी संख्या में शरणार्थी के रूप में रहते हैं. तिब्बत में स्वतंत्रता की माँग को लेकर चल रहे आंदोलन के बड़े पैमाने पर दमन की ख़बरें मिलती रही हैं लेकिन भारत ने इस मामले पर बहुत सतर्कतापूर्ण रवैया अपना रखा है. तिब्बत में आंदोलन भड़कने के बाद से भारत और चीन के संबंधों में एक बार फिर तनाव दिखने लगा है. |
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