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पत्रकारों ने देखा भिक्षुओं का आक्रोश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तिब्बत के कुछ बौद्ध भिक्षुओं ने राजधानी ल्हासा में विदेशी पत्रकारों के दौरे के दौरान हंगामा किया. समाचार एजेंसी एपी के एक संवाददाता ने बताया कि जब पत्रकारों को जोखांग मठ ले जाया जा रहा था, उस दौरान लगभग 30 बौद्ध भिक्षुओं ने तिब्बत और दलाई लामा के समर्थन में नारे लगाए. एक भिक्षु ने नारे लगाए,' तिब्बत स्वतंत्र नहीं है, तिब्बत स्वतंत्र नहीं है...’ और उसके बाद वो रोने लगा. पत्रकार ने बताया कि राजधानी ल्हासा की स्थिति छावनी जैसी बनी हुई है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है. उनका कहना था कि सरकारी भवनों की सुरक्षा के लिए अब भी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. ग़ौरतलब है कि चीनी प्रशासन की देखरेख में बुधवार को विदेशी पत्रकारों के एक दल को तिब्बत ले जाया गया है. हालांकि पत्रकारों के इस दल में बीबीसी को शामिल नहीं किया गया है. पिछले दिनों तिब्बत में शुरू हुए चीन विरोधी प्रदर्शनों और उसके बाद हुई हिंसा के बाद विदेशी पर्यटकों और ख़ासतौर पर पत्रकारों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई थी. राष्ट्रपति बुश का अनुरोध इसके पहले अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने चीन से अनुरोध किया था कि वह तिब्बत के मसले पर निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रतिनिधि दलाई लामा से बातचीत का सिलसिला शुरू करे.
अमरीकी राष्ट्रपति ने बुधवार को चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ से इस संबंध में फ़ोन पर बातचीत की. अमरीकी राष्ट्रपति ने चीनी राष्ट्रपति से ये भी अनुरोध किया था कि तिब्बत में पत्रकारों और राजनायिकों को जाने से न रोका जाए. इस बीच दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों में तिब्बत मूल के लोगों का चीन विरोध जारी है. बुधवार को भारत प्रशासित कश्मीर में भी कुछ तिब्बती मूल के लोगों ने एक शांतिपूर्ण मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज किया था. तिब्बत की राजधानी ल्हासा में पिछले दिनों कुछ उग्र प्रदर्शन हुए थे जिसके दौरान प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग भी हुआ. निर्वासित तिब्बती सरकार के मुताबिक प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा में कम से कम 80 लोगों की मौत हो गई थी. |
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