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गंभीर चर्चा का स्वागत है: दलाई लामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तिब्बत के आध्यात्मिक नेता और निर्वासित सरकार के प्रमुख दलाई लामा ने वार्ता के चीन के प्रस्ताव पर ऐहतियाहत के साथ प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि वे वार्ता का स्वागत करते हैं लेकिन इसका मतलब तभी है जब कि वार्ता को गंभीरता के साथ लिया जाए. चीन ने शुक्रवार को दलाई लामा के प्रतिनिधि के साथ चर्चा का प्रस्ताव दिया है. पिछले महीने से चीन के ख़िलाफ़ तिब्बतियों के लगातार प्रदर्शन के बाद चीन की ओर से यह प्रस्ताव आया है. इस बीत अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से यह कई बार कहा जा चुका है कि चीन को तिब्बत के नेताओं से चर्चा करनी चाहिए. 'स्वागत' चीन के प्रस्ताव पर पत्रकारों ने जब दलाई लामा की प्रतिक्रिया पूछी तो उन्होंने कहा, "यह इस बात पर निर्भर करता है कि चर्चा किस तरह की है. अगर वार्ता गंभीर है तो इसका स्वागत है." उनका कहना था, "सिर्फ़ दोनों पक्षों का आमने-सामने बैठ जाना वार्ता नहीं है." उल्लेखनीय है कि चीन ने दलाई लामा के प्रतिनिधि से मिलने का प्रस्ताव किया है. इससे पहले चीन हमेशा से कहता रहा है कि वह तिब्बत के निर्वासित नेता दलाई लामा से तभी चर्चा करेगा जब 'वह अपनी अलगाववादी गतिविधियाँ छोड़ देंगे' और 'तिब्बत-ताईवान को चीन का अभिन्न अंग मान लेंगे'. चीन ने दलाई लामा पर हाल के चीन विरोधी प्रदर्शनों को संचालित करने का भी आरोप लगाया था. | इससे जुड़ी ख़बरें दलाई लामा से बातचीत की पहल25 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस दलाई लामा को आगाह किया भारत ने01 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस सुलगते तिब्बत पर भारत की ख़ामोशी22 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई थी'20 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस संघर्ष का तरीक़ा बदलें: दलाई लामा19 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस प्रदर्शनों के लिए दलाई लामा को दोष15 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस तिब्बत में प्रदर्शन के दौरान मौत की ख़बरें14 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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