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शुक्रवार, 25 अप्रैल, 2008 को 11:03 GMT तक के समाचार
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दलाई लामा से बातचीत की पहल
चीन विरोधी प्रदर्शन
तिब्बत में चीन विरोधी प्रदर्शन हुए थे
चीन के अधिकारियों ने कहा है कि तिब्बत में मार्च में दंगे और प्रदर्शन होने के बाद अब तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के प्रतिनिधियों से बातचीत की जाएगी.

दलाई लामा के एक प्रवक्ता तेनज़िन ताकला ने बातचीत शुरू करने की चीन की इस पहल का स्वागत किया है.

प्रवक्ता ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि चीन सरकार से इस आशय की आधिकारिक सूचना मिल गई है कि चीन सरकार बातचीत शुरू करने की इच्छुक है.

प्रवक्ता तेनज़िन ताकला ने कहा कि बातचीत का पिछला दौर जून और जुलाई 2007 में बीजिंग में हुआ था.

ओलंपिक मशाल के इर्दगिर्द शुरू हुए तिब्बत प्रदर्शनों ने तिब्बत में हिंसक रूप ले लिया था और भारत सहित अनेक देशों में चीन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए थे.

ग़ौरतलब है कि चीन में इस साल ओलंपिक खेल होने हैं और तिब्बती लोगों ने इस मौक़े को चीन के ख़िलाफ़ अपना रौष प्रकट करने के लिए इस्तेमाल किया.

दलाई लामा के प्रवक्ता ने कहा कि आध्यात्मिक गुरू चीन विरोधी प्रदर्शनों के बाद से ही चीनी लोगों और चीनी नेताओं से संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे थे.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने एक अधिकारी के हवाले से कहा है कि दलाई लामा के साथ बातचीत के लिए बैठक अगले कुछ दिनों के भीतर की जाएगी.

चीन ने तिब्बत में विरोध प्रदर्शनों के लिए दलाई लामा को ज़िम्मेदार बताया है और कहा है कि उन्होंने ही यह अशांति भड़काई है लेकिन तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने ज़ोर देकर कहा है वे कोई राजनीतिक भूमिका नहीं निभाते हैं और चीन विरोधी प्रदर्शनों में उनका कोई हाथ नहीं था.

संपर्क की कोशिश

शिन्हुआ ने एक अधिकारी के हवाले से कहा है कि चीन सरकार ने दलाई लामा पक्ष की तरफ़ से बार-बार किए गए अनुरोध को स्वीकार करते हुए यह बात मान ली है कि बातचीत शुरू की जाए.

चीन विरोधी प्रदर्शन
तिब्बत में चीन विरोधी प्रदर्शनों पर बल प्रयोग किया गया था

इस अधिकारी ने कहा है, "चीन की केंद्र सरकार का संबंधित विभाग आने वाले कुछ दिनों में दलाई लामा के प्रतिनिधि से संपर्क स्थापित करेगा और बातचीत की जाएगी."

लेकिन इस अधिकारी ने यह भी कहा है, "दलाई लामा को चीन को विभाजित करने वाली गतिविधियाँ रोकने की दिशा में ठोस पहल करनी होगी."

तिब्बत के मुखय शहर ल्हासा में दस मार्च को चीन विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए थे जिनका नेतृत्व बौद्ध भिक्षुओं ने किया था.

उसके अगले कुछ सप्ताहों में तो प्रदर्शनों का दायरा और बढ़ गया था. इन प्रदर्शनों में नस्लीय चीनी लोगों को निशाना बनाया गया और उनकी दुकानों को भी नुक़सान पहुँचाया गया था.

चीन ने उन प्रदर्शनों पर बल प्रयोग करके दबाने की कोशिश की थी और भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए थे.

जिन इलाक़ों में असंतोष था, चीन ने उन इलाक़ों में सुरक्षा बलों का इस्तेमाल करके अपना नियंत्रण बहाल किया था.

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