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तिब्बत में प्रदर्शन के दौरान मौत की ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ख़बरों के अनुसार तिब्बत की राजधानी ल्हासा में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुए संघर्ष में कम से कम दो लोग मारे गए हैं. एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि संघर्ष में अनेक लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों की मौत हुई है. अमरीकी रेडियो फ्री एशिया को प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने ल्हासा की सड़कों पर दो लोगों के शव पड़े देखे हैं. इधर तिब्बत में चीन के पिछले 20 साल के शासन के विरोध में सप्ताह भर से प्रदर्शन हो रहे हैं. ये अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शन माने जा रहे हैं. उधर भारत की राजधानी दिल्ली में पुलिस ने ऐसे लगभग 50 तिब्बती प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार कर लिया जिन्होंने चीनी दूतावास में घुसने की कोशिश की. ख़ासतौर से शुक्रवार को काफ़ी ल्हासा में काफ़ी अशांति रही. ल्हासा के पुराने हिस्से में कुछ तिब्बतियों ने आगज़नी की. कुछ चीनी लोगों की दुकानों में लूटपाट की गई और कुछ को नष्ट कर दिया गया. शहर के पुराने हिस्से में गोलियाँ चलने की आवाज़ें सुनी गईं लेकिन हताहतों के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है. चीन के सरकारी मीडिया ने बयान जारी करके इन ख़राब हालात के लिए दलाई लामा को ज़िम्मेदार ठहराया है. उधर तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि ल्हासा की स्थिति को लेकर वो गंभीर रूप से चिंतित हैं.
दलाई लामा ने एक प्रेस वक्तव्य जारी करके चीन से माँग की है वह ल्हासा में बर्बर तरीके से बलप्रयोग करना बंद करे. उन्होंने कहा है कि तिब्बतियों ने जो प्रदर्शन किए वो चीनी शासन के ख़िलाफ़ लंबे समय से चले आ रहे असंतोष का प्रतीक थे. अमरीका और यूरोपीय देशों ने भी चीन से कहा है कि वह ल्हासा में ज़रा धैर्य से काम ले. अमरीका ने कहा है कि चीन को दलाई लामा से अवश्य बात करनी चाहिए. अशांत स्थिति मानवाधिकार संगठनों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ल्हासा में बौद्ध भिक्षुओं के इस सप्ताह शुरू हुए विरोध के बाद सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को तीन बौद्ध मठों को घेर लिया. चश्मदीदों का कहना था कि गुरुवार को ड्रेपुंग और सेरा मठों में पुलिस पहुँच गई. अमरीका से काम करने वाले एक मानवाधिकार संगठन का कहना है कि गंडेन में एक तीसरे मठ को भी घेरा गया. चीनी शासन के विरोध में बौद्ध भिक्षुओं के दो दिनों तक चले विरोध के बाद यह क़दम उठाया गया. गुरुवार को चीन ने बौद्ध भिक्षुओं के प्रदर्शन की बातें तो मानी थीं लेकिन यह भी कहा था कि हालात स्थिर हैं. तिब्बत से किसी भी ख़बर की पुष्टि कर पाना मुश्किल है क्योंकि वहाँ मीडिया और आने-जाने वालों पर कड़ा सरकारी नियंत्रण है. लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस समय चल रहा विरोध पिछले दो दशकों का सबसे बड़ा प्रदर्शन है. प्रदर्शनों का सिलसिला ल्हासा से ग्रामीण इलाक़ों और पड़ोसी प्रांतों तक पहुँच गया है. 'तीन स्तर की घेराबंदी' प्रदर्शन इसी सप्ताह सोमवार से शुरू हुए. उस दिन दुनिया भर में रह रहे तिब्बतियों ने चीनी शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह की 49वीं वर्षगाँठ मनाई थी.
अपुष्ट ख़बरों के मुताबिक़ ड्रेपुंग और सेरा मठों के क़रीब छह सौ बौद्ध भिक्षुओं ने मंगलवार को ल्हासा में शांतिपूर्ण रैली की थी लेकिन उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले दागे. ख़बर यह भी है कि भिक्षुओं को हिरासत में लिया गया है और सेरा मठ में भिक्षु भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है. अमरीकी संगठन 'इंटरनेशनल कैंपेन फ़ॉर तिब्बत' के मुताबिक़ ल्हासा में तीन प्रमुख मठ अब "कड़ी सरकारी निगरानी में हैं और सुरक्षा बलों से घिरे हुए हैं." ल्हासा के रहने वाले एक शख्स ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि सुरक्षा बलों ने मठ की "तीन स्तर" की घेराबंदी कर रखी है. | इससे जुड़ी ख़बरें विरोध मार्च करते तिब्बती गिरफ़्तार13 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस निर्वासित तिब्बतियों के मार्च पर रोक10 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस विरोध जताने निकले निर्वासित तिब्बती...10 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस तिब्बत के पर्यटन में 'रिकार्ड बढ़ोतरी'17 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बौद्ध सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप23 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नए दलाई लामा की खोज कैसे होगी?20 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस तिब्बत की बदलती तस्वीर20 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस दलाई लामा की सुरक्षा बढ़ाई गई05 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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