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सोमवार, 05 मई, 2008 को 19:05 GMT तक के समाचार
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'भारत सरकार कराची में वीज़ा सुविधा दे'

कछी समुदाय
कछी समुदाय के लोग आवाजाही की दिक्कतों से परेशान हैं
कराची के कछी समुदाय ने भारत सरकार से मांग की है कि जाली वीज़ा रखने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए उनके 30 से अधिक लोगों को रिहा किया जाए और कराची में वीज़ा की सुविधा उपलब्ध कराई जाए.

कराची प्रेस क्लब के सामने सोमवार को करीब सौ लोगों ने अपनी परिवारजनों की रिहाई के लिए प्रदर्शन किया.

उन्होंने हाथों में बैनर और प्ले कार्ड उठा कर पाकिस्तान सरकार से रिहाई के लिए भारत सरकार पर दबाव डालने और कराची में भारतीय वीज़ा ऑफ़िस खोलने के लिए नारे लगाए.

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि भारतीय अधिकारियों ने उनके 30 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया है और कहा यह जा रहा है कि उनके पास वैध भारतीय वीज़ा नहीं है.

एक प्रदर्शनकारी दाऊद मंधरा ने बताया कि भारतीय अधिकारियों ने उनके भाई सुल्तान मंधरा, उन की पत्नी और बेटी को गिरफ़्तार किया है जो एक महीना पहले भारत गए थे.

शिकायत

उन्होंने कहा, “मेरे भाई ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त से गुजरात के इलाके भुज और मुंबई का वीज़ा लिया था, एक महीना भुज में रह कर वापस आ रहा था और भारतीय अधिकारियों ने उसे गिरफ़्तार कर लिया”.

 मेरे भाई ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त से गुजरात के इलाके भुज और मुंबई का वीज़ा लिया था, एक महीना भुज में रह कर वापस आ रहा था और भारतीय अधिकारियों ने उसे गिरफ़्तार कर लिया
दाऊद

उनका कहना था कि जाते हुए उनको किसी ने नहीं रोका तो फिर वापसी पर क्यों रोका गया. वो कहते हैं, “हम सालों से भारत आते-जाते रहे हैं और कभी भी एसी घटना नहीं हुई.”

दाऊद ने बताया कि उन्होंने अपने भाई की रिहाई के लिए प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को एक पत्र लिखा है और उन से मांग की है कि वो भारत पर दबाव डालें.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान सरकार कश्मीर सिंह को छोड़ सकती है तो भारत सरकार हमारे परिजनों को क्यों नहीं रिहा कर देती.

कई लोगों ने माना कि उन्होंने एजेंटों से वीज़ा बनवाए

दाईद मंधरा ने भारत सरकार से मांग की कि कराची में उन्हें वीज़ा की सुविधा दी जाए. उन्होंने कहा कि सिंध प्रांत के लोग ही भारत अपने रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं और दुख की बात यह है कि कराची में भारतीय वीज़ा की कोई सुविधा नहीं है.

एक दूसरे प्रदर्शनकारी अकबर ने बताया कि उनकी माँ को भारतीय अधिकारियों ने जाली वीज़ा के आरोप में गिरफ़्तार किया है.

उन्होंने कहा, “मैंने अपनी माँ के वीज़ा के लिए भारतीय उच्चायुक्त को आवेदन दिया था और तीन महीने बीत जाने के बाद कोई जवाब नहीं मिला तो मज़बूरी के तहत एजंट को सोलह हज़ार दे कर वीज़ा लिया.”

अकबर ने कहा कि अगर कराची में वीज़ा की सुविधा होती तो वह एजेंट के पास कभी भी न जाते.

एजेंटों की करतूत

अकबर को जिस एजेंट ने वीज़ा दिया था, उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल फ़ोन बंद था.

उधर भारत में जाली वीज़ा के आरोप में गिरफ़्तार किए गए पाकिस्तानियों के बारे में इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के प्रवक्ता संजय माथुर ने बीबीसी हिंदी को बताया की कुछ लोगों की गिरफ़्तारी की सूचना मिली है.

 मैंने अपनी माँ के वीज़ा के लिए भारतीय उच्चायुक्त को आवेदन दिया था और तीन महीने बीत जाने के बाद कोई जवाब नहीं मिला तो मज़बूरी के तहत एजंट को सोलह हज़ार दे कर वीज़ा लिया
अकबर

उन्होंने बताया कि जो एजेंट जाली वीज़ा दे रहे हैं, उनके बारे में अभी कुछ जानकारी नहीं मिली है.

उन्होंने कहा कि अगर जानकारी मिलती है तो उच्चायोग कुछ नहीं कर सकता क्योंकि यह उनके अधिकार-क्षेत्र में नहीं है.

उन्होंने कहा कि जैसे ही एजेंटों की जानकारी मिलेगी, उच्चायोग ज़रूरी कार्रवाई के लिए पाकिस्तान सरकार को लिखेगा.

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