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विदेशियों को मेडिकल वीज़ा देगा भारत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मेडिकल पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने इलाज के लिए आनेवाले विदेशियों को मेडिकल वीज़ा देने का फ़ैसला किया है. सरकार का कहना है कि देश के नामी अस्पतालों में इलाज के लिए आनेवाले विदेशियों को इलाज के लिए वीज़ा दिया जाएगा. यह वीज़ा एक साल से लेकर इलाज की अवधि के ऊपर निर्भर करेगा. साथ ही इस वीज़ा की अवधि को बढ़ाया जा सकेगा. अभी तक ऐसे लोग पर्यटन वीज़ा पर आते थे जिसे बढ़ाने की व्यवस्था नहीं है. भारत में मेडिकल पर्यटन को सरकार की ओर से बढ़ावा दिया जा रहा है और इलाज के लिए विदेशियों का आना भी शुरु हुआ है. भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने इस बारे में एक अध्ययन किया था. उसके अनुसार यदि प्रयास किए जाएँ तो मेडिकल पर्यटन पर हर साल 10 लाख लोग तक आ सकते हैं. भारत की निगाहें ब्रिटेन जैसे देशों पर भी हैं जहाँ सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन के लिए मरीज़ों को लंबा इंतज़ार करना पड़ता है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजीव मलिक ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि स्वास्थ्य को अब एक उद्योग की तरह माना जा रहा है. उन्होंने बताया कि ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सर्विसेज़ ने हाल में कुछ भारतीय अस्पतालों की पहचान की है जिनमें ब्रिटेन के स्तर का इलाज वहाँ की तुलना में कहीं सस्ता होता है. एक अनुमान के अनुसार दिल की बीमारी के लिए होने वाले ऑपरेशन में जहाँ पश्चिमी देशों में 50,000 डॉलर देने होते हैं वहीं भारत में ये इलाज बस 10,000 डॉलर में हो जाता है. अब एक ऐसे टूर पैकेज तैयार किए जा रहे हैं जिनमें आने-जाने और ठहरने से लेकर इलाज तक का ख़र्च एक ही साथ शामिल हो. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि इस सारी योजना से भारत की चिकित्सा व्यवस्था को कितना फ़ायदा होगा. |
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