BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 02 मई, 2008 को 15:47 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'जज 12 मई को बहाल हो जाएंगे'
नवाज़ शरीफ़ और आसिफ़ अली ज़रदारी
जजों की बहाली के लिए दोनों नेताओ में दुबई में बातचीत हुई
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग (नवाज़) ने कहा है कि देश में आपातकाल के दौरान बर्ख़ास्त किए गए तमाम जज 12 मई 2008 को बहाल कर दिए जाएंगे.

नवाज़ शरीफ़ ने शुक्रवार को लाहौर में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के साथ हुए समझौते के अनुसार तमाम जज बहाल किए जाएंगे.

नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि जजों को बहाल करने के लिए 30 अप्रैल की जो समय सीमा रखी गई थी उस पर कुछ अपरिहार्य कारणों की वजह से अमल नहीं हो सका मगर आसिफ़ अली ज़रदारी के साथ हुई बातचीत में अब इस मुद्दे पर सहमति बन गई है.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मुस्लिम लीग (नवाज़) के बीच दुबई में हाल के दिनों में अहम बातचीत हुई जिसमें क़यास लगाया गया था कि बातचीत का प्रमुख मुद्दा जजों की बहाली ही था.

नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि दोनों ही पार्टियाँ इस बात पर सहमत हैं कि जजों को बहाल किया जाए और इसके लिए आने वाले कुछ दिनों में एक अधिसूचना जारी की जाएगी और इस पूरे मामले पर विचार करने के लिए एक संवैधानिक समिति बनाई जा रही है.

नवाज़ शरीफ़ ने कुछ राजनीतिक माँगें सामने रखते हुए कहा कि उनकी पार्टी की यह माँग है कि संविधान के 17वें संशोधन को रद्द गिया जाए और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद भंग की जाए.

मिशन

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी का अब मिशन है कि देश के संविधान को 12 अक्तूबर 1999 से पहले की स्थिति में लाया जाए, राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पद को कमज़ोर करके प्रधानमंत्री के पद को ताक़तवर बनाया जाए और संसद को संप्रभु बनाया जाए.

इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी
चौधरी आपातकाल में हटा दिए गए थे

उन्होंने कहा कि 18 फ़रवरी को हुए चुनावों के नतीजों में स्पष्ट तौर पर झलकता है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के लिए कोई जगह नहीं है. उन्होंने कहा कि तीन नवंबर 2007 को जब देश में आपातकाल लगाया गया था वह सिर्फ़ पाकिस्तान के लिए काला दिन नहीं था बल्कि पूरी दुनिया में ऐसी कोई मिसाल नहीं मिलती.

नवाज़ शरीफ़ ने कहा, "तीन नवंबर 2007 वो दिन था जब लोकतंत्र का ख़ून हुआ और देश के 16 करोड़ लोगों के साथ धोखाधड़ी की गई."

नवाज़ शरीफ़ ने यह सफ़ाई भी दी कि देश के मुद्दों पर देश से बाहर बातचीत क्यों हुई. इस पर उनका कहना था कि आसिफ़ अली ज़रदारी कुछ पारिवारिक मामलों की वजह से देश से बाहर थे और वह वापिस नहीं आ सकते थे इसलिए बातचीत वहीं हो सकती थी.

नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि जजों की बहाली के मुद्दे पर बातचीत के लिए मुस्लिम लीग (नवाज़) का एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के साथ बातचीत के लिए दुबई गया हुआ था और एक स्तर यह ज़रूरत हुई कि उनके और ज़रदारी के बीच उच्च स्तरीय बातचीत हो जिसके लिए वह ख़ुद दुबई गए.

इससे जुड़ी ख़बरें
जजों की बहाली का अल्टीमेटम दिया
27 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस
गीलानी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली
25 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस
सभी जजों की रिहाई होगी: गीलानी
24 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस
आमने-सामने मुशर्रफ़ और गीलानी
24 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस
'लोकतंत्र का नया युग शुरू हो रहा है'
23 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस
'संविधान संशोधन ही एकमात्र रास्ता'
18 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस
पाकिस्तान: गठबंधन सरकार पर समझौता
09 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>