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जजों की बहाली का अल्टीमेटम दिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि मौजूदा सरकार के गठन से पहले निलंबित किए गए जजों की बहाली के लिए तय समयसीमा का पालन किया जाए. जजों की बहाली के लिए सरकार के गठन के बाद एक महीने की समयावधि रखी गई थी जिसके मुताबिक जजों की पुनर्बहाली 30 अप्रैल तक हो जानी चाहिए. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ गठबंधन को नवाज़ की पार्टी पीएमएलएन का समर्थन हासिल है. नवाज़ ने कहा कि सरकार गठन के लिए जो गठबंधन बना था उसके पीछे जिन कामों को तत्काल किया जाना तय किया गया था, जजों की बहाली उसमें से एक था. इससे पहले शुक्रवार को नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के ही एक अन्य कद्दावर नेता जावेद हाश्मी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर जजों की बहाली का काम तुरंत नहीं किया गया तो मौजूदा सरकार से उनकी पार्टी के मंत्री इस्तीफ़ा दे देंगे. जजों का निलंबन ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में कई जजों को आपातकाल के दौरान निलंबित कर दिया गया था. इन जजों का निलंबन ख़ासा विवादित रहा और इसके विरोध में कई धरने प्रदर्शन भी हुए थे. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने क़रीब 60 जजों को निलंबित कर दिया था. इनमें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी भी शामिल थे. फ़रवरी में आम चुनावों के बाद हालांकि किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था पर सबसे बड़े धड़े पीपीपी को नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने समर्थन दिया ताकि एक गठबंधन सरकार देश की बागडोर संभाल सके. अब नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि गठबंधन सरकार को अपना वादा निभाना चाहिए और जजों की बहाली तय समय से पहले ही हो जानी चाहिए. पर दोनों ही दल अभी इस नतीजे पर नहीं पहुँचे हैं कि जजों की बहाली को कैसे तय किया जाए और ऐसा कैसे किया जाएगा. पिछले दिनों इस सिलसिले में नवाज़ शरीफ़ ने पीपीपी के कार्यवाहक अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी से मुलाक़ात की पर इस मुलाक़ात से कोई नतीजा नहीं निकला और इनकी बहाली के लिए दोनों ने फिर से बातचीत का फैसला लिया है. 'कोई मतभेद नहीं'
हालांकि नवाज़ शरीफ़ ने स्पष्ट किया कि इस अल्टीमेटम के पीछे सरकार के घटक दलों में कोई गंभीर मतभेद जैसी बात निराधार है. उन्होंने कहा कि पीपीपी के साथ उनकी पार्टी के कोई मतभेद नहीं हैं. हालांकि कुछ बाहरी तत्व ऐसी कोशिशों में लगे हैं कि दोनों दलों के बीच संबंधों में दरार पैदा हो. उन्होंने कहा, "ये सरकार तानाशाही को ख़त्म करने के लिए बनी है. हम चाहते हैं कि सरकार अपना काम करे और सेना अपना. सेना के सरकार में दखल करने की गुंजाइश ख़त्म कर देनी चाहिए." जजों की बहाली के मुद्दे पर गठित एक मंत्री स्तरीय समिति के प्रमुख का कहना है कि जजों की बहाली के बारे में समिति ने अपनी सिफ़ारिश रिपोर्ट तैयार कर ली है. इस रिपोर्ट पर केवल आसिफ़ अली ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ के हस्ताक्षर बाक़ी हैं और ये हस्ताक्षर होते ही वकीलों की बहाली का रास्ता साफ़ हो जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें गीलानी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली25 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस सार्वजनिक तौर पर दिखे इफ़्तिखार चौधरी24 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस सभी जजों की रिहाई होगी: गीलानी24 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस आमने-सामने मुशर्रफ़ और गीलानी24 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'लोकतंत्र का नया युग शुरू हो रहा है'23 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'संविधान संशोधन ही एकमात्र रास्ता'18 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान: गठबंधन सरकार पर समझौता09 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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