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मंगलवार, 18 मार्च, 2008 को 19:02 GMT तक के समाचार
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'संविधान संशोधन ही एकमात्र रास्ता'
इफ़्तिख़ार चौधरी
इफ़्तिख़ार चौधरी के निलंबन के ख़िलाफ़ पाकिस्तान में बड़े प्रदर्शन हुए थे
पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मलिक क़य्यूम ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के बर्खास्त जजों को बहाल करने का एकमात्र रास्ता यह है कि संविधान में संशोधन किया जाए.

मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने गत वर्ष मार्च में निलंबित कर दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके निलंबन को ग़लत ठहराते हुए जुलाई में उन्हें बहाल कर दिया था.

इफ़्तिख़ार चौधरी सहित सहित सुप्रीम कोर्ट के 60 जजों को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पिछले साल नवंबर में आपातकाल लगाने के बाद बर्खास्त कर दिया था.

इन जजों का पद पर रहना परवेज़ मुशर्रफ़ को असुविधाजनक लग रहा था और उनका ख़याल था कि ये जज उनके शासन के ख़िलाफ़ क़ानूनी अड़चनें पैदा करेंगे.

जजों की बर्ख़ास्तगी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था.

पाकिस्तान में गठबंधन सरकार बनाने जा रही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग -नवाज़ ने कहा है कि वे संसद में प्रस्ताव लाकर सुप्रीम कोर्ट के जजों की बहाली करेंगे.

लेकिन सत्ता से हटने जा रही सरकार के सबसे बड़े क़ानूनू सलाहकार मलिक क़य्यूम का कहना है कि प्रस्ताव से जजों को बहाल करना क़ानूनी रुप से संभव नहीं होगा.

जहाँ तक संविधान संशोधन का सवाल है तो इसके लिए सरकार को संशोधन को संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से पारित करवाना होगा.

संवाददाताओं का कहना है कि परवेज़ मुशर्रफ़ विरोधी गठबंधन सरकार निचले सदन में तो आवश्यक दो तिहाई बहुमत जुटा लेगी लेकिन ऊपरी सदन में ऐसा संभव नहीं होगा क्योंकि वहाँ परवेज़ मुशर्रफ़ का बहुमत है.

अहम बैठक

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के 15 जजों की एक बैठक हुई.

इस असाधारण क़िस्म की बैठक से लोगों को उम्मीद थी कि बर्ख़ास्त जजों के विवाद पर कुछ बात होगी.

लेकिन बैठक के बाद बयान बँटवा दिया गया जिसमें इस विवाद का कोई ज़िक्र नहीं था.

इस बीच नए नवनिर्वाचित संसद सदस्यों के शपथ लेने के एक दिन बाद यानी मंगलवार को परवेज़ मुशर्रफ़ के क़रीबी जजों ने उनसे मुलाक़ात की.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अनुमान लगाया जा रहा है कि ये जज सुप्रीम कोर्ट के पुराने जजों की बहाली का रास्ता रोकने की कोशिशों में लग गए हैं.

उधर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ऐतेज़ाज़ अहसान, जो धुर मुशर्रफ़ विरोधी माने जाते हैं, ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि यदि कोर्ट परवेज़म मुशर्रफ़ का साथ देते हैं तो वे देशव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे.

हालांकि मलिक क़य्यूम ने इस बात का खंडन किया है कि सुप्रीम कोर्ट के एजेंडा में ऐसा कुछ है.

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