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सरबजीत की परिवार से भावुक मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में फाँसी की सज़ा का सामना कर रहे भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह से गुरुवार को उन के परिवार ने लाहौर की जेल में मुलाक़ात की है. सरबजीत सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर ने 18 साल बाद अपने पति से मुलाक़ात की और उन की बेटियोँ ने पहली बार अपने पिता को देखा. सरबजीत सिंह से मुलाक़ात के समय उन के परिवार की जो भावनाएँ थी वह तो उनके अलावा किसी ने नहीं देखीं लेकिन जब उन के परिजन जेल से बाहर निकले तो काफ़ी भावुक दृश्य था. सरबजीत की दोनों बेटियाँ अपने पिता से मुलाक़ात के समय रो रही थी. पत्नी सुखप्रीत कौर भी अपने आँसू नहीं रोक सकीं. जैसे ही सरबजीत का परिवार जेल से बाहर निकला तो पत्रकारों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया जो क़रीब दो घंटे से उन का इंतज़ार कर रहे थे. किन हालात में सरबजीत सिहं की बहन दलबीर कौर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस मुलाक़ात की इजाज़त देने के लिए पाकिस्तान सरकार और पंजाब गृह मंत्रालय का शुक्रिया अदा किया. दलबीर कौर ने कहा, “यह मुलाक़ात हमारी बहुत भावुकता से हुई. 18 साल के बाद अपने भाई से मिलने और इस हालात में मिलना हम ने कभी सोचा भी नहीं था.”
दलबीर कौर ने बताया कि सरबजीत सिंह ने अपने केस के बारे में जो जानकारी दी है, वह पाकिस्तान और भारत सरकार को ज़रूर बताएँगी. उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि सरबजीत सिंह निर्दोष हैं और उन का किसी भी गुप्तचर एजेंसी से संबंध नहीं है. दलबीर ने पाकिस्तानी जनता से एक बार फिर सहयोग मांगते हुए कहा, “इसी तरह से आप सहयोग देते रहें ताकि दोनों देशों में क़ैद लोग रिहा हो कर अपने अपने घर को जाएँ.” उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी हो या भारतीय, दोनों देशों के कैदी रिहा होना चाहिए. उन्होंने हाथ उठाकर अपने भाई की रिहाई के लिए दुआएँ मांगी. इससे पहले सरबजीत सिंह के परिवार के सदस्य पंजाब गृह मंत्रालय के मुख्यालय पहँचे जहाँ उन्होंने गृह सचिव नदीम हसन आसिफ़ से मुलाक़ात कर सरबजीत सिंह से मुलाक़ात के लिए याचिका दी. सरबजीत सिंह कोट लखपत जेल में बंद हैं. पंजाब गृह मंत्रालय ने सबरजीत सिंह से मुलाक़ात के लिए उन के परिवार को अनुमति देने में कोई देर नहीं की और बाद में उन का परिवार सरबजीत सिंह से मुलाक़ात के लिए कोट लखपत जेल पहँचा. ग़ौरतलब है कि 1990 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चार शहरों में हुए बम धमाकों में 14 लोग मारे गए थे. इन धमाकों में सरबजीत की कथित भूमिका के लिए पाकिस्तान की अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी. बेटियों की अपील सुप्रीम कोर्ट ने भी कुछ साल पहले सरबजीत सिंह को मौत की सज़ा सुनाई थी और एक मई को उन्हें फाँसी देने की घोषणा की गई है. सरबजीत सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर और दोनों बेटियों, स्वप्नदीप और पूनम ने फिर दोहराया कि सरबजीत सिंह निर्दोष हैं और वे भूलवश पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए थे. उनका कहना था कि बम धमाकों में उनके पिता सरबजीत सिंह की कोई भूमिका नहीं थी.
पाकिस्तान सरकार ने सरबजीत सिंह के परिवार को सात दिनों का वीज़ा दिया है और उन का परिवार ननकाना साहब भी जाएगा जहाँ वह सरबजीत की रिहाई के लिए विशेष प्रार्थना करेंगे. सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर और उनके पति सरदार बलदेव सिंह भी परिवार के साथ गए हैं. दलबीर कौर ने कहा, ''हम अपने भाई की रिहाई के सिलसिले में पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी और सरबजीत के वकील राणा अब्दुल हामिद से भी मिलेंगे.'' सरबजीत सिंह का परिवार बुधवार को वाघा सीमा के ज़रिए पाकिस्तान पहँचा था. पाकिस्तान में मानवाधिकार मामलों के पूर्व मंत्री अंसार बर्नी ने सरबजीत सिंह को बचाने की आख़िरी कोशिशों के अधीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास याचिका भेजी है जिसमें उन्होंने अपील की है कि सरबजीत सिंह की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाए या उन्हें रिहा कर दिया जाए. भारत सरकार ने भी सरबजीत की सज़ा माफ़ करने की अपील की थी और माना जा रहा है कि पाकिस्तान की नई सरकार सरबजीत मामले की समीक्षा कर सकती है. उधर पाकिस्तान की नई गठबंधन सरकार मौत की सज़ा वाले कैदियोँ की सज़ा आजीवन कारावास में तबदील करने पर विचार कर रही है और इस मामले में एक संदेश राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को भेजा गया है. माना जा रहा है कि सरकार के नए फैसले से दूसरे क़ैदियों के साथ-साथ सरबजीत सिंह की सज़ा भी आजीवन कारावास में तबदील को सकती है. |
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