|
सरबजीत की रिहाई के लिए... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तानी जेल में लगभग दो दशकों से क़ैद भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह का परिवार उनकी रिहाई की आस में बुधवार को पाकिस्तान पहँचा है. सरबजीत सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर, उन की दो बेटियाँ, बहन और बहनोई सरदार बलदेव सिंह बुधवार को सीमा पार कर लाहौर पहँचे हैं. लाहौर पहँचने पर परिवार के सदस्यों ने शहर में गुरुद्वारा डेरा साहब जाकर प्रार्थना की और सरबजीत सिंह की रिहाई के लिए दुआएँ माँगीं. भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह को पाकिस्तान में वर्ष 1990 में हुए कुछ बम धमाकों में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था जबकि सरबजीत सिंह इन आरोपों से इनकार करते हैं और ख़ुद को बेक़सूर बताते हैं. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कुछ साल पहले सरबजीत सिंह को मौत की सज़ा सुनाई थी और एक मई को उन्हें फाँसी देने की घोषणा की गई है. सरबजीत सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर सिंह बुधवार को जब अपनी बेटियों के साथ लाहौर पहुँचीं तो काफ़ी उदास दिख रही थी. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनका पति मंजीत सिंह ही सरबतीज सिंह है और वह एक सामान्य इंसान हैं.
उन्होंने कहा, “वह खेती बाड़ी का काम करते थे और ग़लती से सीमा पर कर गए थे. सरबजीत ने नशा किया था और नशे की हालत में सीमा पार की थी." सरबजीत सिंह का परिवार ननकाना साहब भी जाएगा और उनकी रिहाई के लिए वहाँ भी विशेष प्रार्थना की जाएगी. बेटियों की अपील सुखप्रीत कौर का कहना था कि उनके पति निर्दोष हैं. जब एक पत्रकार ने उन से पूछा कि उन्होंने अदालत में अपने जुर्म का इक़बाल किया था और कहा था कि उन का असली नाम मंजीत सिंह है, तो सुखप्रीत कौर सिंह ने कहा, "मेरे पति मंजीत सिंह नहीं बल्कि सरबजीत सिंह हैं और मंजीत सिंह ने ऐसा अपराध किया होगा, सरबजीत ऐसा नहीं कर सकते." सुखप्रीत कौर सिंह ने बताया कि वे 18 साल बाद उनसे मुलाक़ात करेंगी और उन्हें पता भी नहीं था कि वह अपने परिवार से बिछड़ जाएँगे. उन्होंने कहा, “मैं सरबजीत के लिए गाँव से खाना बना कर लाई हूँ और यह खाना हम उनके साथ ही खाएँगे. जब तक मुलाक़ात नहीं होती तब तक खाना नहीं खाएँगे.” सरबजीत सिंह की बेटी ने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि उन के पिता निर्दोष हैं और उन्हें रिहा कर दिया जाए.
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “हम तमाम भारतवासियों की दुआएँ लेकर आए है, जैसे भारत और पाकिस्तान के संबंध अच्छे हो रहे हैं और हमें पूरी उम्मीद है कि हमारे पापा को रिहा कर दिया जाएगा.” उन्होंने पाकिस्तान सरकार से कहा कि उनके पिता एक निर्दोष इंसान हैं और उन्होंने पहले ही 18 साल की क़ैद काट ली है, जो आजीवन कारावास की सज़ा से भी अधिक है इसलिए अब तो उन्हें रिहा कर दिया जाए. उधर सरबजीत सिंह के बहनोई सरदार बलदेव सिंह का मानना है कि सरबजीत सिंह बेगुनाह है और उन्होंने पुलिस के दबाव में आ कर किसी जुर्म का इक़बाल किया होगा. उनका कहना था कि उनकी पहचान मिटाई गई है और उन का नाम मंजीत सिंह नहीं बल्कि सरबजीत सिंह है. सरदार बलदेव सिंह ने कहा, “जिस मंजीत सिंह ने लोगों की हत्या की होगी वह कोई और होगा और सरबजीत से उसका कोई संबंध नहीं है.” गौरतलब है कि सरबजीत सिंह को एक मई को फाँसी देने की घोषणा की गई है और मानवाधिकार मामलों के पूर्व मंत्री अंसार बर्नी ने सरबजीत सिंह को बचाने की आख़िरी कोशिशों के तहत राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास याचिका भेजी है. इस याचिका में अंसार बर्नी ने अपील की है कि सरबजीत सिंह की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाए या उन्हें रिहा कर दिया जाए. बीबीसी हिंदी के साथ बातचीत में अंसार बर्नी ने कहा था कि पहले वो भी मानते थे कि सरबजीत सिंह एक चरमपंथी है जिसने 14 लोगों की हत्या की है और उन्हें इस मामले में दिलचस्पी नहीं थी. भारत सरकार ने सरबजीत की सज़ा माफ़ करने की अपील की थी और माना जा रहा है कि पाकिस्तान की नई सरकार सरबजीत मामले की समीक्षा कर सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें सरबजीत के लिए रहम की अपील21 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस सरबजीत मामले में भारत की अपील18 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस 'सरबजीत की रिहाई के लिए सबूत नहीं'11 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस सरबजीत की फाँसी 30 अप्रैल तक टली19 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस सरबजीत मामले में केंद्र सरकार की अपील18 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस सरबजीत के परिवार की मदद की अपील 17 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'सरबजीत की फाँसी की तारीख़ तय'16 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस सरबजीत को सज़ा माफ़ी से इनकार06 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||