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'सूचना के अधिकार से कोई बाहर न हो' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की इस राय से असहमति जताई है कि संवैधानिक पदों पर सूचना का अधिकार लागू नहीं होता है. पत्रकारों से बातचीत में सोमनाथ चटर्जी ने कहा,'' मैं मुख्य न्यायाधीश की राय पर सवाल नहीं उठा रहा हूँ. वो उच्च संवैधानिक पद पर हैं, आपने जो सवाल पूछा है, उस पर मेरी राय है कि जनता के दायरे से हमें किसी को अलग नहीं रखना चाहिए.'' सोमनाथ चटर्जी का कहना था कि लोकतंत्र में जनता सबसे अहम है. उनका कहना था कि यदि सूचनाओं को देने से इनकार किया गया तो अटकलें लगाए जाने की संभावना बढ़ेगी जिससे उस संस्थान की साख पर असर पड़ सकता है. मुख्य न्यायाधीश बालाकृष्णन की बात से अलग सोमनाथ चटर्जी का कहना था,'' हर बात संविधान के तहत है और होनी चाहिए. लेकिन सवाल ये है कि लोगों को जानने का अधिकार है कि नहीं.'' ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने कहा था कि 'सूचना के अधिकार का कानून' अदालत पर लागू नहीं होता. उनका कहना था कि वे सरकारी अधिकारी नहीं हैं कि उन पर सूचना के अधिकार का क़ानून लागू हो. मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में एक पत्रकार के सवाल पर प्रमुख न्यायाधीश ने यह बात कही थी. |
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