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महाराष्ट्र भाजपा का संकट गहराया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता गोपीनाथ मुंडे के पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा देने के बाद पार्टी में हलचल मच गई है. मुंडे के इस्तीफ़े पर जहाँ एक तरफ पार्टी आलाकमान दिल्ली में बैठकें कर रहा है वहीं मुंडे ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं. मुंडे ने केंद्रीय नेतृत्व से मुलाक़ात के लिए जहाँ दिल्ली जाने से इनकार कर दिया है वहीं उनके समर्थन में महाराष्ट्र में कई छोटे नेताओं ने इस्तीफ़ा दे दिया है. पुणे में 16 पार्षदों के इस्तीफ़ा देने की ख़बर है तो मराठवाड़ा क्षेत्र से भी कुछ ऐसी ही ख़बरें आ रही हैं. इस्तीफ़ा देने के एक दिन बाद मुंडे ने पत्रकारों से छोटी से मुलाक़ात के दौरान किसी भी सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया और वही बातें दोहराई जो वो अपने इस्तीफ़े में कह चुके हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेता नितिन गडकरी से उनका कोई विरोध नहीं है लेकिन उन्होंने साफ़ किया कि वो अपने इस्तीफ़े पर विचार के लिए केंद्रीय नेतृत्व से मिलने दिल्ली नहीं जाएंगे. भाजपा नेता शाहनवाज़ हुसैन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि गोपीनाथ मुंडे का मामला घर का मामला है और इसे जल्दी ही हल कर लिया जाएगा. उनका कहना था,'' मुंडेजी ने अपनी भावनाएँ व्यक्त की हैं और उस पर विचार किया जाएगा. पार्टी में कोई झगड़ा नही, ये आतंरिक लोकतंत्र की निशानी है और सभी लोगों को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता है.'' नियुक्ति पर विवाद हालांकि मुंडे का पक्ष रखने के लिए उनकी ओर से कुछ नेता दिल्ली रवाना हो चुके हैं. मुंडे का कहना था कि उनके समर्थन में लाखों लोग हैं और वो पार्टी की कार्यशैली से नाराज़ हैं क्योंकि पार्टी के कई फ़ैसलों में उनसे कोई राय नहीं ली जा रही है. मुंडे के इस्तीफ़े का तात्कालिक कारण मुंबई भाजपा अध्यक्ष के तौर पर मधु चौहान की नियुक्ति मानी जा रही है. लेकिन प्रेक्षक बताते हैं कि पिछले कई महीनों से मुंडे केंद्रीय नेतृत्व से नाराज़ चल रहे हैं. मधु चौहान भाजपा नेता गडकरी के नज़दीक माने जाते हैं और अब गडकरी भी दिल्ली जा रहे हैं. इस बीच पार्टी के कई विधायकों ने मुंडे से मुलाक़ात की और उनके प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है. ऐसे समय में जब केंद्रीय नेतृत्व नए लोगों को पदों पर आसीन कर रहा है मुंडे जैसे कद्दावर नेता का कड़ा रवैया पार्टी के लिए आने वाले चुनावों में मुश्किलें खड़ी कर सकता है. शायद इसीलिए मुंडे का इस्तीफ़ा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है. इस पर अब भी बातचीत चल रही है |
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