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आलोचना से देशमुख की मुश्किलें बढ़ीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ काँग्रेस के नेता और राज्य मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्री नारायण राणे ने अपनी ही सरकार के कामकाज की सार्वजनिक आलोचना करके मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अपने तेवरों को लेकर चर्चा में रहने वाले राणे के बयान को आधार बनाकर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में मध्यावधि चुनाव कराने की माँग कर दी है. ग़ौरतलब है कि नारायण राणे दो साल पहले ही शिवसेना से नाता तोड़कर काँग्रेस में शामिल हुए थे. विभिन्न समाचार माध्यमों के अनुसार राणे ने दिल्ली में पार्टी महासचिव मार्ग्रेट अल्वा से मुलाक़ात की और सरकार से अपनी नाराज़गी का इज़हार किया. काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के पास अपनी बात रखने के लिए उन्होंने समय माँगा है. राणे ने राज्य सरकार के कामकाज के तरीके को निशाना बनाया है. समाचार एजेंसियों के अनुसार राणे ने कहा, "मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि सरकार उस तरह से नहीं चल रही है, जिस तरह उसे चलना चाहिए. समाधान तलाशने से ज़्यादा सवाल उठाए जा रहे हैं. सरकार जिस तरह से चलाई जा रही है उससे मैं खुश नहीं हूं." उन्होंने कहा, "समय आ गया है कि मैं अपनी बात सबके सामने रखूँ." राणे ने पार्टी नेतृत्व से कहा है कि अगर सरकार इसी तरीक़े से चलती रही तो 2009 में होने वाले विधानसभा चुनाव में दिक्कत होगी. देशमुख आश्वस्त
राज्य में हुए उपचुनावों में काँग्रेस की जीत को उनके समर्थकों ने राणे के आगमन से जोड़कर प्रचारित किया. अब राणे के इस बयान को उनकी बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है. लेकिन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख बदलते समीकरणों के बीच भी अपनी कुर्सी को लेकर निश्चिंत हैं. उन्होंने कहा है कि राज्य में कोई नेतृत्व परिवर्तन नहीं होने जा रहा. राणे के बयान पर उनका कहना रहा, "लोकतंत्र में मतभेद होना सामान्य बात है." देशमुख ने कहा, "अग़र उन्हें कोई दिक्कत थी तो वे मुझसे कह सकते थे." भाजपा ने बनाया मुद्दा राणे के बयान को आधार बनाकर भाजपा ने राज्य में चुनाव कराने की माँग की है. पार्टी के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री गोपीनाथ मुंडे ने कहा, "यह राज्य सरकार के अंदर संकट का संकेत है." मुंडे कहते हैं, "ऐसी स्थिति में राज्य का विकास पीछे चला जाएगा इसलिए उन्हें चुनाव कराकर लोगों से नए सिरे से जनादेश लेना चाहिए." राज्य भाजपा के नेता नितिन गडकरी ने भी राणे की कही बातों का हवाला देते हुए देशमुख सरकार को विफल करार दिया है. गडकरी ने कहा, "राणे को मन की बात कहने के लिए बधाई देता हूँ. राज्य को उसी पार्टी से दूसरा मुख्यमंत्री नहीं बल्कि नया जनादेश चाहिए." | इससे जुड़ी ख़बरें 'अमिताभ पर चल सकता है मुक़दमा'03 जून, 2007 | भारत और पड़ोस नारायण राणे की भारी भरकम जीत22 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस शिवसेना में बेटा-भतीजा विवाद चरम पर17 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस राणे के काँग्रेस में शामिल होने की तैयारी22 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस राणे ने इस्तीफ़ा दिया, कदम नए नेता12 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस महाराष्ट्र विधानसभा में हंगामा11 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस नारायण राणे शिवसेना से निष्कासित03 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस महाराष्ट्र सरकार को दस दिन मिले04 जून, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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