|
चार अल्फ़ा विद्रोही मारे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम के शिवसागर ज़िले में सेना और पुलिस के संयुक्त अभियान में अलगाववादी संगठन अल्फ़ा के चार सदस्य मारे गए हैं. सरकारी सूत्रों ने बताया कि विद्रोहियों ने नाफ़ुक नहारानी गाँव के एक परिवार के घर में बंदूक की नोंक पर शरण ले रखी थी. विद्रोहियों के छुपे होने की ख़ुफ़िया ख़बर के आधार पर सुरक्षा बलों ने शनिवार तड़के इलाक़े को घेर लिया. सूत्रों ने बताया कि विद्रोहियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी कर दी और जवाबी कार्रवाई में चार विद्रोही मौक़े पर ही मारे गए. उनका कहना है कि उस परिवार के किसी सदस्य को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा है क्योंकि विद्रोहियों ने उन्हें घर के एक कमरे में बंद कर दिया था. मारे गए सभी विद्रोही अल्फ़ा की 28वीं बटालियन के लड़ाके थे और इनमें दो की पहचान भी कर ली गई है. इनके पास से हथियारों के अलावा एक 'सार्जेंट मेजर' राम सिंह के नाम संबोधित कई लिफ़ाफ़े मिले हैं. पिछले चार महीनों में सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण अल्फ़ा की गतिविधियाँ सीमित रही है. इस दौरान उसके कई बड़े नेता या तो गिरफ़्तार कर लिए गए या मुठभेड़ में मारे गए. अल्फ़ा और केंद्र सरकार के बीच बातचीत वर्ष 2006 में टूट गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें अल्फ़ा के साथ मुठभेड़ में कैप्टन की मौत 28 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस अल्फ़ा के 66 सदस्यों का आत्मसमर्पण01 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस असम में छह लोगों की मौत, 30 घायल30 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस असम में संघर्षविराम ख़त्म, कार्रवाई शुरु24 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस केंद्र और अल्फ़ा सीधे बातचीत करेंगे22 जून, 2006 | भारत और पड़ोस असम में अल्फ़ा ने कई धमाके किए22 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान बंद27 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस अल्फ़ा को बिना शर्त बातचीत का न्यौता28 मई, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||