|
अल्फ़ा के साथ मुठभेड़ में कैप्टन की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
असम में अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ असम (अल्फ़ा) के साथ मुठभेड़ में सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी की मौत हो गई है. कैप्टन एस चौधरी की अगुआई में गोरखा रेजिमेंट के जवानों ने अल्फ़ा के एक ठिकाने पर धावा बोला और दोनों ओर से हुई गोलीबारी में उनकी मौत हो गई. उन्हें एक दिन पहले ही गणतंत्र दिवस के अवसर पर बहादुरी के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया था. डूमडूमा के पास जंगलों में रविवार को हुई मुठभेड़ में दो अलगाववादी भी मारे गए लेकिन बाकी अलगाववादी भागने में सफल रहे. पिछले तीन महीनों में सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण अल्फ़ा की गतिविधियाँ सीमित रही है. इस दौरान इसके कई बड़े नेता और गिरफ़्तार कर लिए गए या मुठभेड़ में मारे गए. अल्फ़ा और केंद्र सरकार के बीच बातचीत वर्ष 2006 में टूट गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें असम पुलिस की फ़ायरिंग तीन मरे02 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस राजधानी एक्सप्रेस धमाके की चपेट में12 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस असम में 12 मज़दूरों की हत्या27 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस अल्फ़ा के 66 सदस्यों का आत्मसमर्पण01 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस उल्फ़ा के ख़िलाफ़ कार्रवाई में दो मारे गए07 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||