BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 28 मई, 2005 को 19:54 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
अल्फ़ा को बिना शर्त बातचीत का न्यौता

अल्फ़ा के विद्रोही
अल्फ़ा हिंसक अभियान चला रहा है
भारत सरकार ने असम में सक्रिय अलगाववादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (अल्फ़ा) को बातचीत का न्यौता दिया है और कहा है कि वे कोई भी मुद्दा उठा सकते हैं जिसमें असम की संप्रभुता का मुद्दा भी शामिल है.

भारत सरकार और अल्फ़ा के बीच बातचीत की मध्यस्थता कर रही असम की एक अग्रणी लेखिका इंदिरा गोस्वामी का कहना है कि प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की तरफ़ से एक पत्र अल्फ़ा के चेयरमैन अरबिंद राजखोवा को भेजा गया है.

इस पत्र में आश्वासन दिया गया है कि अल्फ़ा के नेता बातचीत में कोई भी मुद्दा उठा सकते हैं जिसमें असम की संप्रभुता की माँग भी शामिल है.

अल्फ़ा ने अभी तक भारत सरकार के साथ बातचीत में अभी तक यह कहते हुए हिस्सा नहीं लिया है कि बातचीत में असम की संप्रभुता का मुद्दा भी शामिल किया जाना चाहिए.

इंदिरा गोस्वामी ने असम की व्यावसायिक राजधानी गोवाहाटी में शनिवार को पत्रकारों को बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने एक पत्र शुक्रवार को उन्हें सौंपा है और यही पत्र अरबिंद राजखोवा को भी सौंपा गया है.

इंदिरा गोस्वामी ने कहा कि अल्फ़ा को अब बातचीत में शामिल होना चाहिए क्योंकि सुरक्षा सलाहकार नारायणन ने पत्र में साफ़तौर पर कहा है कि अल्फ़ा के नेता बातचीत में कोई भी मुद्दा उठा सकते हैं.

गोस्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार ने अब बातचीत के लिए मंच तैयार कर दिया है और अल्फ़ा को बिना कोई देर किए, इस मौक़े का फ़ायदा उठाना चाहिए.

लेकिन अल्फ़ा की तरफ़ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

हिंसा

अल्फ़ा ने पिछले दो दिनों में असम के कम से कम चार इलाक़ों में काफ़ी हिंसक घटनाएँ की हैं, कुछ स्थानों पर बिजली के ट्रांसफॉर्मर, पुल और गैस पाइपलाइनें उड़ा दीं.

असम में सेना
असम में सेना की कड़ी चौकसी है

इनके अलावा सेना के एक गश्ती दल पर भी हमला किया जिसमें एक जवान मारा गया और चार घायल हो गए. लेकिन शनिवार की सुबह से हिंसा रोक दी गई है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अब भारत सरकार ने अल्फ़ा को चेहरा बचाने का मौक़ा दे दिया है, यहाँ तक कि असम की संप्रभुता का मुद्दा भी उठाने की इजाज़त दे दी है लेकिन इस मुद्दे पर किसी चर्चा का कोई आश्वासन नहीं दिया है.

असम के ज़्यादातर विद्रोही गुटों ने भारत सरकार के साथ बातचीत पहले ही शुरू कर दी है जिनमें नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ असम (एनडीएफ़बी) भी शामिल है जो अल्फ़ा का सहयोगी संगठन रहा है.

एनडीएफ़बी बोडो जनजाति के लिए अलग राज्य का माँग कर रहा है जबकि अल्फ़ा असम की आज़ादी की माँग कर रहा है.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>