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असम में दस लोगों की हत्या | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के असम राज्य में विद्रोहियों की अंधाधुंध गोलीबारी में कम से कम दस लोग मारे गए हैं. असम के धुबरी ज़िले में एक भीड़ भरे बाज़ार में हुई इस घटना में तेरह लोग घायल हुए हैं. अधिकारियों के अनुसार इस घटना में पाँच या छह हथियारबंद विद्रोही शामिल थे जिन्होंने भीड़ पर गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं. पुलिस का कहना है कि मारे गए ज़्यादातर लोग बांग्लाभाषी मुसलमान और स्थानीय आदिवासी थे. अधिकारियों का कहना है कि घायलों में से चार लोगों की हालत बहुत गंभीर है जिससे मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है. असम पुलिस का कहना है कि विद्रोही नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड यानी एनडीएफ़बी से संबंधित थे. असम और नगालैंड में पिछले कुछ दिनों से हिंसा का दौर चल रहा है जिसमें अब तक 80 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और एक सौ से अधिक लोग घायल हो गए हैं. इन घटनाओं से चिंतित केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल सोमवार को असम और नगालैंड का दौरा किया. पाटिल ने ज़ोर दिया कि पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद का मुक़ाबले करने की रणनीति के तहत सेना, अर्धसैनिक बलों और आम लोगों के बीच तालमेल क़ायम करने की कोशिश की जाएगी. दोनों हिंसाग्रस्ता राज्यों के दौरे के बाद उन्होंने कहा, "लोगों की जान बचाने के लिए केंद्र अतिरिक्त सुरक्षा बल समेत हर तरह की सहायता उपलब्ध कराएगा." पाटिल ने एक बार फिर पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों से बिना शर्त बातचीत की प्रक्रिया से जुड़ने की अपील की. एनडीएफ़बी से बातचीत का प्रस्ताव असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने भी रखा था जिसका संगठन ने स्वागत किया था लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है. |
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