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बुधवार, 30 जनवरी, 2008 को 13:57 GMT तक के समाचार
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धर्मापमान पर मृत्युदंड का समर्थन
अफ़ग़ानिस्तान
कुछ देशों की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस फ़ैसले को बदलने की अपील की है
अफ़ग़ान संसद के उच्च सदन ने उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में इस्लाम के अपमान के आरोप में एक पत्रकार को दी गई मौत की सज़ा का समर्थन किया है.

परवेज़ कमबख़्श नामक 23 वर्षीय पत्रकार को वहां पिछले सप्ताह इस्लाम का अपमान करने वाला एक लेख डाउनलोड करके वितरित करने के आरोप में ये सज़ा सुनाई गई थी.

परवेज़ ने इस्लाम का अपमान करने के इस आरोप से इनकार किया है.

संयुक्त राष्ट्र ने इस सज़ा की आलोचना की है और कहा है कि इस मामले की सुनवाई के दौरान पत्रकार का पक्ष रखने के लिए उसके पास कोई वकील नहीं था.

अफ़ग़ान सरकार ने कहा है कि उसका यह फ़ैसला अंतिम नहीं है.

आलोचना

हाल ही में सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले को पूरी सतर्कता के साथ देखा जाएगा.

अब अफ़ग़ान संसद ने इस मामले पर जारी एक बयान में कहा है कि इस फ़ैसले पर मतदान नहीं किया गया है लेकिन उनके नेता सिबग़तुल्लाह मोजद्दीदी के हस्ताक्षर कराए गए हैं जो राष्ट्रपति हामिद करज़ई के सहयोगी हैं.

इसमें कहा गया है कि उच्च सदन ने मज़ार-ए-शरीफ़ की एक अदालत में पत्रकार कमबख़्श को दिए गए मृत्युदंड का समर्थन किया है.

इसमें उन संस्थाओं और विदेशी स्रोतों की भी तीख़ी आलोचना की गई है जिन्होंने उनके अनुसार कमबख़्श जैसे लोगों को बढ़ावा देकर देश की सरकार और न्यायपालिका पर दबाव डालने की कोशिश की.

कुछ देशों की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस फ़ैसले को बदलने की अपील की है.

 संवैधानिक रूप से देश की संसद को इस बात की इजाज़त नहीं है कि वह इस तरह के मामलों में दख़ल दे, जैसा कि यहाँ की संसद ने किया है
कानून विशेषज्ञ वदीर सैफ़ी

स्वतंत्रता का हनन

एक कानूनी विशेषज्ञ वदीर सैफ़ी ने बीबीसी से कहा कि संवैधानिक रूप से देश की संसद को इस बात की इजाज़त नहीं है कि वह इस तरह के मामलों में दख़ल दे, जैसा कि यहाँ की संसद ने किया है.

उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि यह नया बयान न्यायधीशों की स्वतंत्रता का हनन कर सकता है.

पत्रकार परवेज़ कमबख़्श के भाई याक़ूब कमबख़्श ने बीबीसी से कहा कि परवेज़ अपने इस मामले में बहुत सशंकित था क्योंकि उनके पास अपना बचाव करने के लिए वकील ही नहीं था लेकिन मज़ार-ए-शरीफ़ के गवर्नर ने कहा कि मामले को तय प्रक्रिया के अनुसार ही देखा जा रहा है.

परवेज़ कमबख़्श इस मामले में अभी दो और अदालतों में अपील कर सकते हैं और इस फ़ैसले पर अमल करने के लिए राष्ट्रपति हामिद करज़ई का अनुमोदन लेना ज़रूरी होगा.

परवेज़ कमबख़्श बल्ख़ विश्वविद्यालय के छात्र हैं और जहाँ-ए-नो (नया संसार) नामक अख़बार के लिए पत्रकारिता करते हैं.

उन्हें 2007 में इस्लामिक समाज में महिलाओं की भूमिका से संबंधित सामग्री डाउनलोड करने के बाद ग़िरफ़्तार किया गया था.

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