| बंगाल में उपन्यासकार के ख़िलाफ़ कार्रवाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल के एक जाने-माने उपन्यासकार और कवि सुनील गंगोपाध्याय के ख़िलाफ़ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगा है. इस मामले में पुलिस ने शिकायत दर्ज की है और कार्रवाई शुरु हो गई है. एक बंगाली अख़बार में सुनील गंगोपाध्याय के हवाले से हिंदू देवी सरस्वती की एक मूर्ति और उसके सौंदर्य के बारे में की गई टिप्पणी पर ये विवाद शुरु हुआ है. उन्होंने कहा था कि देवी सरस्वती के सौंदर्य से प्रभावित होकर उन्होंने देवी की मूर्ति को चूमा था. गंगोपाध्याय ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा, "इसका वर्णन मेरी आत्मकथा में है और ये तब की बात है जब मैं 14 साल का था और ये आत्मकथा पाँच साल पहले छपी थी." उनका कहना था, "हिंदुओं में देवी देवताओं के साथ लोगों का अलग रिश्ता होता है और उन्हे लेकर काफ़ी रंग-तमाशा भी होता है." सुनील गंगोपाध्याय का कहना था, "यदि कोई इसे पूरा पढ़े तो समझेगा कि इसका हिंदू धर्म या मानसिक विकृति से कोई संबंध नहीं है और यदि न्यायालय ने इस बारे में पूछा तो भी कहूँगा कि जो लिखा ठीक ही लिखा." उन्होंने इस आरोप का खंडन किया कि उनका मक]सद सस्ती लोकप्रियता पाना नहीं है क्योंकि उनकी पुस्तकें पहले ही बहुत बिकती हैं. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के प्रमुख रह चुके बिभूति भूषण नंदी ने पुलिस में शिकायत की थी कि गंगोपाध्याय ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ को आहत किया है. नंदी का कहना था कि वे सरस्वती के पुजारी हैं और उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची है क्योंकि गंगोपाध्याय ने सरस्वती की मूर्ति को 'अपवित्र' किया है. पहले जाधवपुर पुलिस थाने ने नंदी की शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया लेकिन जब वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया तो मामला दर्ज कर लिया गया. |
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